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UPI पर MDR चार्ज: RBI ने दिया समर्थन — आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?

UPI पर MDR चार्ज: RBI ने दिया समर्थन — आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?

UPI पर चार्ज लगेगा — लेकिन आप पर नहीं। यही है वो एक लाइन जो हर किसी को समझनी चाहिए, बाकी सब उसके बाद।

भारतीय रिजर्व बैंक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी आधिकारिक बयान में केंद्र सरकार के उस फैसले का खुलकर समर्थन किया है, जिसमें ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की मंजूरी दी गई है। RBI ने साफ शब्दों में कहा कि यह कदम भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है। यह कोई मनमाना फैसला नहीं — यह उस infrastructure को जिंदा रखने की कोशिश है जिस पर आज करोड़ों भारतीय रोज़ भरोसा करते हैं।

MDR है क्या, और यह किस पर लगेगा?

MDR वह शुल्क है जो पेमेंट प्रोसेसिंग की लागत को cover करने के लिए merchants से लिया जाता है। नई व्यवस्था के तहत यह दर 0.4% तय की गई है और प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। यानी अगर कोई ग्राहक किसी दुकान पर ₹5,000 का UPI पेमेंट करता है, तो मर्चेंट को ₹20 MDR देना होगा। ₹10,000 के ट्रांजैक्शन पर ₹40, ₹50,000 पर ₹200, और ₹75,000 या उससे ऊपर के किसी भी पेमेंट पर अधिकतम ₹300 — बस इतना। RBI ने स्पष्ट कर दिया है कि यह खर्च मर्चेंट का है, ग्राहक का नहीं। बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि कोई भी merchant MDR की यह लागत customer पर transfer न करे।

₹2,000 से कम के P2M (Person-to-Merchant) ट्रांजैक्शन पहले की तरह merchants के लिए भी बिल्कुल मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा, जो छोटे दुकानदार या कारोबारी हर महीने ₹1 लाख तक का UPI collection करते हैं, उन्हें MDR के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है — ताकि digital payment की यह क्रांति गली-मोहल्ले के छोटे व्यापारियों तक भी बिना बोझ के पहुंचती रहे।

RBI को यह कदम क्यों जरूरी लगा?

UPI आज दुनिया का सबसे बड़ा real-time payment system है — यह भारत की तकनीकी शक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है। लेकिन इस system को चलाना मुफ्त नहीं है। Servers, security infrastructure, payment acceptance networks, और नई technology में लगातार निवेश चाहिए। RBI का तर्क सीधा है: जब UPI का volume बढ़ता है, तो infrastructure की मांग भी बढ़ती है, और बिना revenue model के यह ecosystem टिकाऊ नहीं रह सकता।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि MDR से मिलने वाले राजस्व का उचित बंटवारा technology, infrastructure और payment acceptance networks में निरंतर निवेश को बढ़ावा देगा। इससे UPI की acceptance देशभर में और बढ़ेगी, नए users जुड़ेंगे, और transaction volume में वृद्धि की रफ्तार बनी रहेगी। यह सोच short-term populism से ऊपर उठकर long-term nation-building की है — और यही Bharat की असली ताकत है।

RBI ने अपने बयान के अंत में यह भी दोहराया कि वह इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि UPI सुरक्षित, सरल, किफायती और सभी के लिए सुलभ बना रहे। ग्राहकों के लिए — चाहे P2P हो या P2M — सभी UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। यह India का digital payment revolution है, और अब इसे एक मजबूत financial foundation भी मिल रही है।

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