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सुदर्शनपुरा के लाल सक्षम घोसल्या ने PM मोदी को दिखाई स्वदेशी 5G की ताकत, IIT से भारत मंडपम तक का जबरदस्त सफर

सुदर्शनपुरा के लाल सक्षम घोसल्या ने PM मोदी को दिखाई स्वदेशी 5G की ताकत, IIT से भारत मंडपम तक का जबरदस्त सफर

एक गांव, एक इंजीनियर, और भारत की टेक क्रांति का चेहरा

राजस्थान के जयपुर ग्रामीण जिले की जालसू तहसील में बसे छोटे से गांव सुदर्शनपुरा ने देश को एक ऐसा बेटा दिया है जिसने नई दिल्ली के भारत मंडपम में खड़े होकर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत में बनी स्वदेशी 5G तकनीक समझाई. यह सिर्फ एक युवा इंजीनियर की कहानी नहीं है, यह उस भारत का प्रमाण है जो अब टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है.

सक्षम घोसल्या, हैदराबाद की डीप टेक कंपनी WiSig Networks में प्रिंसिपल इंजीनियर, ESTIC 2026 यानी इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव में भारत की स्वदेशी संचार तकनीक के प्रतिनिधि बने. 27 से 29 अक्टूबर तक चले इस सम्मेलन में 13 मंत्रालयों की भागीदारी थी और यह मंच उतना ही बड़ा था जितनी सक्षम की उपलब्धि.

PM मोदी के सामने स्वदेशी 5G का लाइव डेमो

भारत मंडपम में प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए जब प्रधानमंत्री मोदी WiSig Networks के स्टॉल पर पहुंचे, तब सक्षम ने उन्हें स्वदेशी 5G बेस स्टेशन की पूरी कार्यप्रणाली विस्तार से समझाई. यह तकनीक ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की क्षमता रखती है, यानी उन्हीं जगहों तक जहां अभी तक डिजिटल इंडिया का सपना अधूरा है.

सक्षम ने PM को Koala NB-IoT चिप से भी परिचित कराया. यह चिप उन स्थानों पर भी इंटरनेट कनेक्टिविटी देने में सक्षम है जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क की पहुंच नहीं है, यानी सैटेलाइट से सीधे जुड़ने वाली यह चिप भारत के सबसे दूरस्थ कोनों को भी नेटवर्क से जोड़ सकती है. इसके साथ ही उन्होंने भविष्य की 6G रिसर्च पर चल रहे अनुसंधान की जानकारी भी दी.

यह वह पल था जब सुदर्शनपुरा की मिट्टी भारत मंडपम की रोशनी में चमकी.

गांव की पाठशाला से IIT मंडी और IIT हैदराबाद तक

सक्षम बालकिशन चौधरी और राजू देवी के बेटे हैं. उनकी पढ़ाई की शुरुआत सुदर्शनपुरा के स्थानीय सरकारी स्कूल से हुई. कोई बड़ा कोचिंग सेंटर नहीं, कोई महंगी तैयारी नहीं, बस अपनी मेहनत और जिद के दम पर उन्होंने IIT मंडी में दाखिला लिया और 2016 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक पूरा किया. पढ़ाई के दौरान वे संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स क्लब के सह-संस्थापक भी रहे, जो उनकी leadership की शुरुआती झलक थी.

बीटेक के बाद सक्षम IIT हैदराबाद में रिसर्च असिस्टेंट बने और 2017 में WiSig Networks से जुड़े, जो उस वक्त एक नया स्टार्टअप था. उन्होंने 2021 में कम्युनिकेशन एंड सिग्नल प्रोसेसिंग में एमटेक की डिग्री भी हासिल की. एक ही संस्थान में काम और पढ़ाई साथ-साथ, यही discipline आज उन्हें देश के सबसे महत्वपूर्ण टेक मंचों पर खड़ा करती है.

BRICS से फ्रांस तक, भारत की आवाज बने सक्षम

ESTIC 2026 से पहले भी सक्षम घोसल्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय तकनीक का परचम लहरा चुके हैं. सितंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन की प्रदर्शनी में उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को WiSig Networks के उत्पादों की जानकारी दी. इसके बाद फ्रांस के नीस शहर में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम में उन्होंने यूरोप के मंच पर भारतीय संचार तकनीक की क्षमता को सिद्ध किया.

यह वह भारत है जो अब सिर्फ तकनीक का उपभोक्ता नहीं, निर्माता है. WiSig Networks जैसी कंपनियां और सक्षम जैसे इंजीनियर उस narrative को जमीन पर साबित कर रहे हैं जो कभी सिर्फ नीति दस्तावेजों में लिखा जाता था.

सुदर्शनपुरा और पूरे जयपुर क्षेत्र में आज गर्व का माहौल है. और यह गर्व सिर्फ एक परिवार का नहीं, उस पूरी पीढ़ी का है जो सरकारी स्कूलों की बेंच से उठकर देश की टेक क्रांति की अगुवाई कर रही है.

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