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बंगाल में RSS की क्रांति: जहाँ कभी डर था, अब लग रही हैं लाइनें — सदस्यता 5 गुना बढ़ी

बंगाल में RSS की क्रांति: जहाँ कभी डर था, अब लग रही हैं लाइनें — सदस्यता 5 गुना बढ़ी

बंगाल में RSS की लहर: एक महीने में 1 लाख आवेदन, पुराना डर हुआ खत्म

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में वो दौर अब इतिहास बन चुका है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखा में जाने पर लोगों को डराया-धमकाया जाता था। सरकार बदलते ही बंगाल में संघ से जुड़ने वालों की तादाद रिकॉर्ड तेज़ी से बढ़ रही है — सिर्फ एक महीने में 1 लाख ऑनलाइन आवेदन आए हैं, जो पहले के मुकाबले 5 गुना ज़्यादा है।

नंबर बोलते हैं — 20,000 से सीधे 1,00,000

संघ के सूत्रों के अनुसार, पहले बंगाल से हर महीने करीब 20,000 ऑनलाइन आवेदन मिलते थे। अब यह संख्या एक ही महीने में 1 लाख तक पहुँच गई है।

और यह सिर्फ ऑनलाइन आंकड़ा है। अधिकांश लोग अभी भी ऑफलाइन — सीधे शाखा या कार्यालय जाकर सदस्यता लेते हैं, जिसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। यानी असली संख्या इससे भी कहीं ज़्यादा हो सकती है।

49 साल का डर — कम्युनिस्ट और TMC राज में संघ था “खतरनाक”

जो बंगाल भारतीय राष्ट्रवाद की जन्मभूमि माना जाता है — जहाँ से स्वामी विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस और श्री अरबिंदो जैसे महापुरुष उठे — वहाँ 49 वर्षों के कम्युनिस्ट और TMC शासन में संघ से जुड़ना जोखिम भरा था।

Zee News की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि आम नागरिकों को संघ की शाखाओं में जाने पर डराया और आतंकित किया जाता था। लेकिन जैसे ही राजनीतिक माहौल बदला, दबी हुई भावनाएं सतह पर आ गईं।

राष्ट्रीय स्तर पर भी RSS का विस्तार — 107% की छलांग

बंगाल की यह कहानी किसी अपवाद की नहीं, बल्कि एक बड़े राष्ट्रीय ट्रेंड की है। पिछले 12 वर्षों में पूरे देश में संघ का विस्तार ऐतिहासिक रहा है।

सिर्फ पिछले एक साल में 5,820 नई शाखाएं खुलीं और 3,943 नए स्थानों तक संघ की पहुँच हुई।

दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन — और बड़ा होने को तैयार

RSS को पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन कहा जाता है। बंगाल में यह नई लहर इस संगठन की ताकत को और विस्तार देगी।

नई सरकार के आने के बाद बंगाल के स्कूलों में सात्विक भोजन परोसने की तैयारी भी हो रही है — यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक और संकेत है। भारत माँ की इस धरती पर, राष्ट्रवाद की वापसी हो रही है — और इस बार, बिना किसी डर के।

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