पाकिस्तान के नाजायज कब्जे वाले कश्मीर — जिसे दुनिया PoK कहती है, लेकिन जो भारत का अभिन्न अंग है — वहां एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। 24 सितंबर 2026 को वहां राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने वाला है, और इस तारीख का ऐलान खुद PoK के इलेक्शन कमीशन ने 15 सितंबर को मुजफ्फराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए किया।
यह पद जनवरी 2026 से खाली पड़ा है — जब बैरिस्टर सुल्तान महमूद चौधरी के निधन के बाद से कुर्सी रिक्त है। PoK के मुख्य चुनाव आयुक्त गुलाम मुस्तफा मुगल ने स्पष्ट किया कि वोटिंग असेंबली सचिवालय में सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगी, और उसी दिन मतगणना के बाद नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे।
यह चुनाव बहुमत के आधार पर होगा और इसमें सिर्फ विधानसभा के सदस्य ही इलेक्टोरल कॉलेज का हिस्सा होंगे। यानी आम जनता की राय नहीं, बल्कि विधायकों के वोट तय करेंगे कि PoK का अगला “राष्ट्रपति” कौन होगा।
पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के पास इस सीट पर साफ बहुमत है, और ऐसे में उसके उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि सुधनोती जिले के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर नजीब नकी इस पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि PML-N और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के बीच तालमेल बढ़ाने की कोशिश में यह पद PPP को भी दिया जा सकता है।
PML-N के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न बताने की शर्त पर ‘डॉन’ को बताया कि अभी तक किसी दूसरी पार्टी को यह पद देने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनके शब्दों में — “राजनीति में कोई बात आखिरी नहीं होती। PML-N के उम्मीदवार का नाम पार्टी प्रमुख नवाज शरीफ सही वक्त पर तय करेंगे।”
भारत के नजरिए से देखें तो यह पूरी कवायद एक ऐसे इलाके में हो रही है जो संवैधानिक और ऐतिहासिक रूप से भारत का हिस्सा है। पाकिस्तान वहां जो भी चुनावी नाटक रचे, वह उस जमीन पर उसके नाजायज कब्जे को वैधता नहीं दे सकता। PoK की जनता दशकों से पाकिस्तानी सेना और ISI के शिकंजे में है — और इस्लामाबाद में बैठे नेता उनके भविष्य का फैसला करते हैं, न कि वे खुद। यह चुनाव उस कड़वी सच्चाई को एक बार फिर उजागर करता है।

