एक दशक, अनगिनत बदलाव
विगत दस वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों ने भारत के राष्ट्रीय जीवन को जिस गहराई से छुआ है, वह किसी साधारण शासन की कहानी नहीं है — यह एक सभ्यतागत पुनर्जागरण की गाथा है। विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक और मानवीय मार्गदर्शक, श्री माता अमृतानंदमयी देवी — जिन्हें करोड़ों लोग प्रेम से अम्मा कहते हैं — ने इस परिवर्तन को न केवल देखा है, बल्कि उसे अपने दशकों पुराने स्वप्नों का प्रतिबिंब भी पाया है। उनके शब्दों में, यह बदलाव भौतिक समृद्धि और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बीच संतुलन साधने की एक सजीव प्रक्रिया है।
एक तटीय गाँव से विश्वगुरु तक का सफर
अम्मा का जन्म केरल के एक छोटे से मछुआरा गाँव में हुआ था, जहाँ बचपन से ही उन्होंने गरीबी और कष्ट को करीब से देखा। उन्हीं अनुभवों ने उनके भीतर निःस्वार्थ सेवा और करुणा की वह अग्नि जलाई जो आज करोड़ों लोगों को रोशनी देती है। यही कारण है कि जब वे PM मोदी में अनासक्ति का गुण देखती हैं, तो वह केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं होती — वह एक आत्मीय पहचान होती है।
PM मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनने से पहले से जानने वाली अम्मा का कहना है कि समाज सुधार के प्रति उनका समर्पण कभी कम नहीं हुआ — बल्कि हर नई जिम्मेदारी के साथ और प्रखर होता गया।
विश्वगुरु भारत — सपना नहीं, संकल्प
अम्मा की सबसे गहरी अभिलाषा यही है कि भारत एक बार पुनः विश्व-गुरु और विश्व-मित्र के रूप में विश्व-मंच पर प्रतिष्ठित हो। और यह केवल कानूनों से नहीं, बल्कि परिवर्तित हृदयों से होगा — जब प्रत्येक नागरिक अपने भीतर दीप प्रज्वलित करेगा। यह संदेश आज के GenZ भारत के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना किसी भी पीढ़ी के लिए रहा है। भारत उठ रहा है — और यह उठान सिर्फ GDP के आंकड़ों में नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक आत्मा की जागृति में दिखती है।

