New Labour Code से बदला सैलरी स्ट्रक्चर, करोड़ों कर्मचारियों की जेब पर असर
नई दिल्ली: अगर इस महीने आपकी टेक-होम सैलरी कम आई है, तो घबराइए नहीं — यह कोई गलती नहीं, बल्कि New Labour Code का सीधा असर है। देशभर में लाखों कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी घटी है, और कंपनियां अब इसकी वजह समझाने में जुटी हैं।
क्यों घटी सैलरी? समझिए असली वजह
नए लेबर कोड के तहत एक अहम नियम लागू हुआ है — किसी भी कर्मचारी की Basic Salary उसके कुल CTC (Cost to Company) का कम से कम 50% होनी चाहिए। पहले कंपनियां बेसिक सैलरी को जानबूझकर कम रखती थीं ताकि PF और ग्रेच्युटी का बोझ कम पड़े।
अब जब बेसिक बढ़ा, तो उस पर आधारित Provident Fund (PF) और Gratuity का योगदान भी बढ़ गया। नतीजा? हर महीने हाथ में आने वाला पैसा कम हो गया।
Real Example: एक IT प्रोफेशनल की कहानी
आईटी प्रोफेशनल दीपक सी. का उदाहरण बताता है कि जमीनी हकीकत क्या है। उनके सालाना CTC में ₹90,000 की बढ़ोतरी हुई, लेकिन उसमें से ₹40,000 सिर्फ ग्रेच्युटी में चले गए — जो पहले केवल ₹20,000 थी।
यानी असली take-home बढ़ोतरी सिर्फ ₹50,000 रही, वो भी PF और अन्य कटौतियों के बाद और कम हो गई। Short-term में झटका जरूर लगा, लेकिन long-term game अलग है।
Experts क्या कह रहे हैं?
AZB & Partners के विक्रम श्रॉफ के मुताबिक, जिन कंपनियों में बेसिक सैलरी 50% से कम थी, उन्होंने इसे बढ़ाकर नियमों के अनुरूप किया। इससे सैलरी के दूसरे allowances घटे और PF कटौती बढ़ी।
EY India के पार्टनर पुनीत गुप्ता ने बताया कि पहले ग्रेच्युटी की गणना केवल Basic + DA पर होती थी। अब इसे Social Security Code 2020 में दी गई ‘Wages’ की नई परिभाषा से जोड़ा गया है, जिससे गणना का आधार बड़ा हो गया है।
झटका या फायदा? — असली तस्वीर
Bottom Line: Short-term Pain, Long-term Gain
यह बदलाव उन करोड़ों भारतीय कर्मचारियों के लिए है जो रिटायरमेंट की प्लानिंग नहीं करते। सरकार ने जबरदस्ती एक forced savings mechanism बना दिया है — आज कम मिलेगा, लेकिन कल की नींव मजबूत होगी।
GenZ और Millennials के लिए यह समझना जरूरी है कि CTC और In-Hand Salary में फर्क होता है — और अब यह फर्क और बड़ा हो गया है। Salary slip को ध्यान से पढ़ें, HR से बात करें, और अपने भविष्य निधि को एक asset की तरह देखें।

