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भारत का बेटा अंतरिक्ष में: अनिल मेनन ISS पर पहुंचे, करेंगे ऐसे प्रयोग जो बदल देंगे Space Medicine का भविष्य

भारत का बेटा अंतरिक्ष में: अनिल मेनन ISS पर पहुंचे, करेंगे ऐसे प्रयोग जो बदल देंगे Space Medicine का भविष्य

इतिहास लिख दिया। भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर कदम रख दिया है — और यह सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे भारत, खासकर केरल की मलयाली विरासत का गर्व है।

रूसी अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos का Soyuz MS-29 यान भारतीय समयानुसार रात 8:17 बजे कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रवाना हुआ। महज तीन घंटे की उड़ान के बाद रात 11:52 बजे यह यान ISS के Prichal मॉड्यूल से सुरक्षित जुड़ गया। मेनन के साथ रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना भी इस मिशन का हिस्सा हैं। इनके पहुंचने के बाद ISS पर मौजूद क्रू की संख्या अस्थायी रूप से 10 हो गई है।

आठ महीने, अनगिनत प्रयोग — और Space Medicine का नया अध्याय

यह डॉ. मेनन की पहली अंतरिक्ष यात्रा है, और वे अगले आठ महीनों तक ISS पर रहकर ऐसे वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे जिनका असर आने वाली पीढ़ियों के अंतरिक्ष मिशनों पर पड़ेगा। पूरी टीम की पृथ्वी पर वापसी अप्रैल 2027 में निर्धारित है, और तब तक वे Expedition-74 और Expedition-75 दोनों मिशनों का हिस्सा रहेंगे।

मेनन का सबसे अहम काम होगा — यह समझना कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से इंसानी शरीर पर क्या असर पड़ता है। ब्लड सर्कुलेशन कैसे बदलता है, नसें और हड्डियां कैसे प्रभावित होती हैं, और शरीर की समग्र कार्यप्रणाली में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं — इन सवालों के जवाब NASA के आगामी Artemis प्रोजेक्ट और मंगल मिशन के लिए बेहद जरूरी हैं। NASA ने स्पष्ट किया है कि मेनन खुद भी इन studies में test subject के रूप में काम करेंगे।

Bioprinting Vascular तकनीक के जरिए उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जुड़े जैविक परिवर्तनों पर भी गहन शोध होगा — यानी अंतरिक्ष में इंसान जल्दी बूढ़ा क्यों होता है, इसका राज खोलने की कोशिश। इसके साथ ही वे Augmented Reality (AR) और Artificial Intelligence (AI) की मदद से अल्ट्रासाउंड तकनीक का परीक्षण करेंगे, जिससे भविष्य के मिशनों में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की मदद के बिना खुद ही अपना मेडिकल चेकअप कर सकेंगे — चाहे वे चांद पर हों, मंगल पर हों, या उससे भी आगे।

मेनन ISS पर semiconductor crystals के in-space production को बेहतर बनाने वाली research को भी आगे बढ़ाएंगे। इस रिसर्च से high-performance computers, AI systems और medical devices के लिए जरूरी components की manufacturing बड़े पैमाने पर संभव हो सकती है। और एक और game-changing प्रयोग — ISS के drinking water system से intravenous (IV) fluid बनाने की technology का test, जो deep-space missions में medical supplies की कमी को पूरा कर सकती है।

कौन हैं अनिल मेनन — एक इंसान, अनेक पहचान

अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ। उनके पिता केरल से हैं और माँ यूक्रेनी — यानी उनकी रगों में दो महान सभ्यताओं का संगम है। वे पेशे से emergency medicine के डॉक्टर, mechanical engineer और US Space Force में Colonel हैं। अफगानिस्तान में Operation Enduring Freedom के दौरान उन्होंने US Air Force के साथ Military Flight Surgeon के रूप में सेवा दी।

वे पहले मलयाली मूल के व्यक्ति हैं जो अंतरिक्ष की यात्रा पर गए हैं — और यह गर्व सिर्फ उनका नहीं, पूरे Kerala का है। मेनन अक्सर अपनी मातृभाषा मलयालम में social media पर post करते हैं और ISRO की हर सफलता को दिल से celebrate करते हैं। Rotary Ambassadorial Scholar के रूप में उन्होंने एक वर्ष भारत में बिताया, जहां उन्होंने polio vaccination programs का अध्ययन किया और Himalayan Rescue Association के साथ Mount Everest पर पर्वतारोहियों को medical support भी दिया।

NASA में आने से पहले वे Elon Musk की SpaceX में पहले Flight Surgeon थे — उन्होंने वहां का पूरा medical program खड़ा किया और Starship development में भी योगदान दिया। 2021 में NASA के astronaut program के लिए उनका चयन हुआ। और उनकी पत्नी Anna Menon भी NASA astronaut हैं, जो SpaceX के Polaris Dawn mission — दुनिया के पहले commercial spacewalk — का हिस्सा रह चुकी हैं। यह जोड़ी सच में out-of-this-world है।

Mission से पहले platform X पर मेनन ने लिखा कि US Space Force, NASA और अंतरराष्ट्रीय partners का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है। 26 जुलाई को Expedition 75 शुरू होगा। भारत का यह बेटा अब सितारों के बीच है — और वहाँ से वह science की ऐसी नींव रख रहा है, जिस पर आने वाली पीढ़ियाँ चाँद और मंगल पर अपने घर बनाएंगी।

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