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Su-57 से BrahMos तक: मोदी-पुतिन की ‘महाबैठक’ में भारत-रूस रिश्तों का नया अध्याय लिखा जाएगा

Su-57 से BrahMos तक: मोदी-पुतिन की 'महाबैठक' में भारत-रूस रिश्तों का नया अध्याय लिखा जाएगा

दिल्ली इस शुक्रवार इतिहास की गवाह बनने जा रही है। 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आमने-सामने बैठेंगे — और यह मुलाकात सिर्फ एक diplomatic courtesy नहीं, बल्कि भारत की rising global power का सबसे बड़ा प्रमाण है। मंच है 18वें BRICS Summit 2026 का, जिसकी अध्यक्षता भारत कर रहा है — और यह अकेला तथ्य ही बताता है कि दुनिया की शतरंज पर भारत अब मोहरा नहीं, खिलाड़ी है।

यह दोनों नेताओं की करीब एक हफ्ते में दूसरी मुलाकात होगी। इससे पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO Summit के दौरान दोनों मिले थे। लेकिन इस बार का एजेंडा कहीं बड़ा है — रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, व्यापार, अंतरिक्ष और नई टेक्नोलॉजी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पहले ही साफ कर दिया है कि दोनों नेता द्विपक्षीय एजेंडे को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे और उन्होंने मोदी-पुतिन के रिश्ते को “बेहद करीबी और भरोसे वाला” करार दिया है।

सबसे बड़ा मुद्दा — जिस पर हर किसी की नजर टिकी है — वह है Su-57 Fifth Generation Fighter Jet। रूस ने पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि भारत को Su-57 बेचने का मुद्दा इस बैठक के एजेंडे में है। यह महज एक हथियार खरीद नहीं है — यह भारत की वायु शक्ति को एक नई पीढ़ी में ले जाने का मौका है। Su-57 दुनिया के सबसे एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट्स में शुमार है, और अगर यह डील हकीकत बनती है तो भारतीय वायुसेना की ताकत का नया chapter लिखा जाएगा।

लेकिन असली game-changer है technology transfer की बात। क्रेमलिन ने संकेत दिया है कि Su-57 की production technology भारत के साथ साझा करने की संभावनाओं पर चर्चा चल रही है। पेस्कोव ने BrahMos का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे भारत-रूस ने मिलकर दुनिया की सबसे तेज़ supersonic cruise missile बनाई, वैसे ही Su-57 के मामले में भी सहयोग की राह खुल सकती है। BrahMos एक मिसाल है — यह साबित करता है कि जब भारत और रूस साथ आते हैं, तो दुनिया को नोटिस लेना पड़ता है।

रक्षा के बाद दूसरा सबसे अहम मुद्दा है परमाणु ऊर्जा। पेस्कोव ने स्पष्ट कहा है कि रूस भारत में नए nuclear power plants लगाने को लेकर बातचीत आगे बढ़ाने का इंतजार कर रहा है। भारत जैसे देश के लिए — जो 2047 तक Viksit Bharat का सपना देख रहा है — clean और reliable energy की जरूरत अब optional नहीं, strategic priority है। इसके साथ ही S-400 की बाकी deliveries और दूसरे joint defense projects पर भी बातचीत की उम्मीद है।

व्यापार और आर्थिक साझेदारी तीसरा बड़ा स्तंभ है। दोनों देश bilateral trade बढ़ाने, mutual investment और एक-दूसरे के बाजारों में अपनी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी पर ध्यान देंगे। BRICS के संदर्भ में de-dollarisation का मुद्दा भी उठेगा — हालांकि पेस्कोव ने साफ किया कि रूस किसी एक करेंसी को हटाने की मुहिम नहीं चला रहा, लेकिन alternative payment mechanisms के लिए तैयार है। यह भारत के लिए भी अहम है क्योंकि रुपये में trade settlement Bharat की financial sovereignty को मजबूत करता है।

और फिर है Ukraine का मुद्दा — जो इस मुलाकात की सबसे संवेदनशील परत है। रूस ने माना है कि मॉस्को भारत की उस सोच से काफी हद तक सहमत है कि इस संघर्ष का हल बातचीत और कूटनीति से निकलना चाहिए। पुतिन, मोदी को frontline की मौजूदा स्थिति से अवगत कराएंगे। PM मोदी का वह ऐतिहासिक वाक्य — “यह युद्ध का युग नहीं है” — आज भी दुनिया में गूंजता है, और भारत के शांति प्रयास इस बातचीत का हिस्सा होंगे।

एक और मुद्दा है जो सीधे हर भारतीय के दिल को छूता है — रूसी सेना में फंसे भारतीय नागरिक। भारत ने यह मामला कई बार उठाया है। रूस ने आश्वासन दिया है कि वह युद्धक्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की पहचान कर सूची तैयार कर रहा है और पहचान पूरी होते ही उन्हें स्वदेश भेजा जाएगा। यह मोदी सरकार की उस नीति का प्रमाण है जिसमें हर भारतीय — चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में हो — सरकार की प्राथमिकता है।

पेस्कोव ने अमेरिका के उस प्रस्ताव को भी “अवैध और अस्वीकार्य” करार दिया है जिसमें रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% tariff लगाने की बात है। यह भारत के लिए सीधे relevant है — क्योंकि भारत रूसी crude oil का एक बड़ा खरीदार बन चुका है और यह arrangement भारत की energy security और economic sovereignty दोनों के लिए फायदेमंद है। Washington का दबाव है, लेकिन भारत अपने national interest में फैसले लेता है — यही Bharat की असली geopolitical maturity है।

शुक्रवार की यह बैठक तीन बड़े संभावित announcements के लिए याद रखी जा सकती है — Su-57 deal और technology transfer, नए nuclear energy projects, और एक मजबूत trade-energy partnership framework। कोई बड़ा समझौता होगा या नहीं, यह 11 सितंबर की शाम तय हो जाएगा। लेकिन एक बात अभी से तय है — BRICS के भव्य मंच पर होने वाली यह मुलाकात महज एक औपचारिक photo-op नहीं है। यह भारत-रूस रिश्तों के अगले बड़े अध्याय का रोडमैप है — और इस रोडमैप के केंद्र में है एक आत्मनिर्भर, शक्तिशाली और विश्वगुरु बनने की राह पर चलता हुआ भारत।

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