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SEBI का CAS प्रस्ताव: शेयर बाजार में बड़े बदलाव की तैयारी — क्या 3:45 बजे तक होगी ट्रेडिंग?

SEBI का CAS प्रस्ताव: शेयर बाजार में बड़े बदलाव की तैयारी — क्या 3:45 बजे तक होगी ट्रेडिंग?

भारतीय बाजार को मिलेगा नया ढांचा — SEBI की बड़ी पहल

भारत का शेयर बाजार एक नए युग की दहलीज पर खड़ा है। Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने 12 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण Consultation Paper जारी किया है, जिसमें Closing Auction Session (CAS) से जुड़े ट्रेडिंग नियमों में व्यापक बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्ताव का केंद्रीय तर्क यह है कि CAS फ्रेमवर्क को तब तक डेरिवेटिव्स सेटलमेंट का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए, जब तक उसमें पर्याप्त लिक्विडिटी और बाजार की परिपक्वता न आ जाए — और यही थीसिस पूरे प्रस्ताव की रीढ़ है। यह बदलाव न केवल तकनीकी है, बल्कि यह भारत के financial ecosystem को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक सुविचारित कदम है, जो Bharat के growing market को और अधिक transparent और robust बनाएगा।

सेटलमेंट प्राइस का सवाल: Blended VWAP बनाम मौजूदा व्यवस्था

SEBI ने एक्सपायरी के दिन इंडेक्स और सिंगल-स्टॉक डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस निर्धारण के लिए दो विकल्प सुझाए हैं, और इन दोनों के बीच का चुनाव बाजार की दिशा तय करेगा। Option 1 — Blended VWAP के तहत सेटलमेंट प्राइस की गणना Continuous Trading Session (CTS) के अंतिम 30 मिनट और 10 मिनट के CAS सत्र में हुए ट्रेड्स के आधार पर होगी, जहाँ प्रत्येक अवधि का योगदान उसके वास्तविक ट्रेडेड वैल्यू पर निर्भर करेगा — किसी पूर्व-निर्धारित वेटेज पर नहीं। यह approach अधिक dynamic है, क्योंकि यह बाजार की वास्तविक गतिविधि को प्रतिबिंबित करती है और price discovery को अधिक organic बनाती है। हालांकि, इसकी जटिलता और CAS में अभी सीमित participation को देखते हुए, SEBI ने स्वयं माना है कि इसे लागू करने के लिए “कम से कम एक साल” की प्रतीक्षा उचित होगी।

Option 2 में मौजूदा CTS VWAP पद्धति को अंतरिम व्यवस्था के रूप में जारी रखने का प्रस्ताव है, जिसमें सेटलमेंट प्राइस केवल CTS के अंतिम 30 मिनट के ट्रेड्स पर आधारित होगी। यह पद्धति बाजार सहभागियों को पहले से परिचित है, पारदर्शी है, और परिचालन की दृष्टि से अच्छी तरह समझी जाती है। अधिकांश ब्रोकर्स और रेगुलेटरी एक्सपर्ट्स ने इसी विकल्प को प्राथमिकता दी है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि डेरिवेटिव्स सेटलमेंट को एक ऐसे auction mechanism पर निर्भर किया जाए जिसकी liquidity और participant behavior अभी भी evolve हो रहे हैं। यह सावधानी जायज है — किसी भी बड़े बाजार सुधार की सफलता उसकी तैयारी पर निर्भर करती है, न कि केवल उसके इरादे पर।

ट्रेडिंग समय में बदलाव: 3:30 या 3:45 — फैसला बाजार बदल देगा

SEBI ने ट्रेडिंग की समय-सीमा के लिए भी दो विकल्प प्रस्तुत किए हैं, और दोनों के बाजार पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेंगे। Option A के तहत CAS स्टॉक्स के लिए Continuous Trading 3:30 बजे तक चलेगी, उसके बाद लगभग एक मिनट के transition period के बाद CAS 3:31 से 3:40 बजे तक होगा, और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:45 बजे तक जारी रहेगी। यह विकल्प बाजार के कुल active समय को बढ़ाता है और traders को अधिक flexibility देता है, जो विशेष रूप से उन GenZ investors के लिए महत्वपूर्ण है जो real-time market movements को closely track करते हैं। Option B में Continuous Trading 3:15 बजे तक, CAS 3:15 से 3:25 बजे तक, और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 3:30 बजे तक समाप्त होगी — यानी मौजूदा closing time पर वापसी, लेकिन एक structured auction window के साथ।

दोनों विकल्पों में एक महत्वपूर्ण समानता यह है कि SEBI ने Continuous Trading और CAS के बीच transition period को पाँच मिनट से घटाकर लगभग एक मिनट करने का प्रस्ताव दिया है। यह बदलाव operational efficiency के लिहाज से सकारात्मक है, क्योंकि पाँच मिनट का लंबा gap बाजार में uncertainty पैदा करता था और arbitrage opportunities को जन्म देता था। एक मिनट का transition एक cleaner, sharper handover सुनिश्चित करेगा, जो modern, algorithm-driven trading के युग में अधिक उपयुक्त है।

IIV और Iceberg Orders: बारीकियाँ जो बड़ा फर्क डालती हैं

SEBI के प्रस्ताव में दो और तकनीकी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। पहला, Indicative Index Value (IIV) का प्रसार CAS के दौरान बंद करने का प्रस्ताव है, जबकि security-level Indicative Equilibrium Prices (IEPs) जारी रहेंगी। SEBI ने स्पष्ट किया कि IIV को कुछ stakeholders गलत समझ रहे थे, जिसके कारण वे indicative values के आधार पर positions ले रहे थे — यह एक ऐसी प्रवृत्ति है जो market integrity को नुकसान पहुँचाती है और price discovery को distort करती है। यह निर्णय बाजार की पारदर्शिता के लिए सही दिशा में उठाया गया कदम है। दूसरा प्रस्ताव यह है कि CAS book में unexecuted Iceberg Orders की मात्रा को पूरी तरह से प्रदर्शित सामान्य limit orders में बदल दिया जाए, जिससे auction process में सभी participants को समान जानकारी मिले और कोई भी hidden order asymmetric advantage न उठा सके।

CAS की पृष्ठभूमि और भारत का बड़ा सफर

यह समझना जरूरी है कि CAS फ्रेमवर्क कोई नई अवधारणा नहीं है — दुनिया के प्रमुख बाजारों जैसे London Stock Exchange और Euronext में यह पहले से लागू है। भारत ने इसे equity cash segment में listed derivatives वाले stocks के लिए 3 अगस्त 2026 से लागू किया, जिसने पहले की उस व्यवस्था की जगह ली जिसमें closing price केवल Continuous Trading के अंतिम 30 मिनट के VWAP पर आधारित होती थी। यह संक्रमण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का derivatives market दुनिया के सबसे बड़े और सबसे active markets में से एक बन चुका है — और ऐसे में settlement mechanism की robustness सीधे करोड़ों निवेशकों के हितों से जुड़ी है। SEBI का यह Consultation Paper इस बात का प्रमाण है कि भारत का नियामक ढांचा reactive नहीं, बल्कि proactive और thoughtful है — जो Bharat की financial superpower बनने की यात्रा को और अधिक credible बनाता है।

अब गेंद बाजार सहभागियों के पाले में है। SEBI ने stakeholders से इन प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया माँगी है, और यह consultation process ही तय करेगी कि भारतीय शेयर बाजार का अगला अध्याय कैसा दिखेगा। जो बाजार कभी केवल “emerging” कहलाता था, वह आज वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है — और SEBI जैसे सुधार इस transformation को और तेज करेंगे।

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