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NSE IPO Listing: भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की BSE पर धमाकेदार एंट्री, 0.84% प्रीमियम पर हुई लिस्टिंग

NSE IPO Listing: भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की BSE पर धमाकेदार एंट्री, 0.84% प्रीमियम पर हुई लिस्टिंग

इंतजार खत्म, NSE ने BSE पर रखा कदम

24 सितंबर 2025 की सुबह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक यादगार पल के रूप में दर्ज हो गई, जब National Stock Exchange (NSE) के शेयर आखिरकार BSE पर लिस्ट हुए — और वो भी शानदार अंदाज में। सुबह ठीक 10 बजे, लाखों निवेशकों की धड़कनें तेज हुईं और NSE का शेयर ₹1,800 प्रति शेयर पर BSE पर लिस्ट हुआ, जो IPO प्राइस ₹1,785 से 0.84% का प्रीमियम था। यह वो क्षण था जिसका इंतजार भारत के करोड़ों रिटेल निवेशकों, QIB और NII सभी को था।

लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में NSE के शेयर का GMP (Grey Market Premium) ₹38 प्रति शेयर था, जिसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा था कि लिस्टिंग ₹1,823 के आसपास होगी — यानी IPO प्राइस से करीब 2.13% ऊपर। हालांकि, ग्रे मार्केट के भाव अनऑफिशियल होते हैं और वास्तविक लिस्टिंग अक्सर इनसे अलग होती है, जो इस बार भी साबित हुआ। फिर भी, लिस्टिंग के बाद बाजार में तेजी का रुख बना रहा।

सुबह 11:15 बजे तक NSE का शेयर ₹1,852 पर कारोबार कर रहा था — यानी लिस्टिंग प्राइस से 2.93% की तेजी। यह संकेत था कि बाजार ने NSE को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे भविष्य की एक मजबूत कंपनी के रूप में पहचाना।

IPO का सफर: 17 सितंबर से 24 सितंबर तक

NSE का IPO 17 सितंबर को खुला था और 21 सितंबर को बंद हुआ। इसका प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर के बीच तय किया गया था। यह पूरा IPO Offer for Sale (OFS) था, अर्थात् मौजूदा शेयरधारकों ने अपने हिस्से बेचे — कंपनी को इससे कोई नई पूंजी नहीं मिली, बल्कि यह उन निवेशकों के लिए एग्जिट का मौका था जो वर्षों से NSE में हिस्सेदार थे। कुल मिलाकर यह ₹22,562 करोड़ का विशाल इश्यू था।

सब्सक्रिप्शन के आंकड़े बताते हैं कि बाजार ने NSE IPO को किस उत्साह से अपनाया। कुल मिलाकर IPO को 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। QIB (Qualified Institutional Buyers) कैटेगरी में यह आंकड़ा 12.68 गुना रहा, जो संस्थागत निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। NII (Non-Institutional Investors) कैटेगरी में 6.55 गुना सब्सक्रिप्शन हुआ, जबकि रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से को 1.39 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

एक्सपर्ट्स की राय: NSE है long-term bet

CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, Motilal Oswal AMC के पूर्व CIO निकेत शाह ने NSE की लिस्टिंग पर अपनी राय रखते हुए कहा कि अगर आप भारत की अर्थव्यवस्था और बाजार की ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव हैं, तो NSE को लेकर नकारात्मक नजरिया रखना मुश्किल है। उनका मानना है कि NSE को एक लंबी अवधि में लगातार बढ़ने वाली कंपनी के रूप में देखना चाहिए, न कि केवल लिस्टिंग गेन के नजरिए से।

निकेत शाह ने यह भी कहा कि शेयरों की अधिक सप्लाई से कोई बड़ी समस्या नहीं होगी, क्योंकि जैसे-जैसे कंपनी की कमाई बढ़ती रहेगी, नए निवेशक बाजार में आते रहेंगे। रेगुलेटरी बदलावों पर बाजार में अल्पकालिक प्रतिक्रिया हो सकती है, लेकिन निवेशक धीरे-धीरे खुद को इनके अनुसार ढाल लेते हैं — यह भारतीय बाजार की परिपक्वता का प्रमाण है। India का capital market ecosystem अब सिर्फ grow नहीं कर रहा, बल्कि mature भी हो रहा है।

भारत का दूसरा सबसे बड़ा IPO — एक ऐतिहासिक मील का पत्थर

₹22,562 करोड़ के साथ NSE का IPO भारत का दूसरा सबसे बड़ा IPO बन गया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड Hyundai Motor India के नाम था, जिसने 2024 में ₹27,858.75 करोड़ का IPO लाकर इतिहास रचा था। NSE का यह IPO इस मायने में भी खास है क्योंकि यह खुद एक एक्सचेंज का IPO है — यानी वो संस्था जो दूसरी कंपनियों को लिस्ट करती है, आज खुद लिस्ट हुई।

इस विशाल IPO को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए कुल 20 बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किए गए, जिनमें Kotak Capital, JM Financial, Morgan Stanley India, Citigroup, HSBC Securities, DAM Capital, Equirus Capital, Avendus Capital, Axis Capital, HDFC Bank, ICICI Securities, IDBI Capital, JPMorgan India, SBI Capital, Anand Rathi Advisors, IIFL Capital, Motilal Oswal, Nuvama Wealth, Pantomath Capital और 360 ONE WAM शामिल थे। इतने बड़े और विविध बैंकर पैनल का होना खुद इस IPO की ऐतिहासिक महत्ता को रेखांकित करता है।

NSE की यह लिस्टिंग सिर्फ एक कंपनी का शेयर बाजार में प्रवेश नहीं है — यह भारत के financial ecosystem की ताकत, उसके capital markets की गहराई और एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति के आत्मविश्वास का प्रतीक है। जो देश कभी विदेशी निवेश का मोहताज था, आज उसका अपना सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज खुद BSE पर लिस्ट हो रहा है — यही है नया भारत।

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