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NEET विवाद: ‘दुबई-पाकिस्तान से जंतर-मंतर पर खाना मंगवाया जा रहा है’ — राजस्थान BJP अध्यक्ष ने उठाए बड़े सवाल

NEET विवाद: 'दुबई-पाकिस्तान से जंतर-मंतर पर खाना मंगवाया जा रहा है' — राजस्थान BJP अध्यक्ष ने उठाए बड़े सवाल

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक को लेकर जो विरोध प्रदर्शन चल रहा है, वह अब सिर्फ एक शैक्षणिक विवाद नहीं रहा — इसके तार कहीं और जुड़ते दिख रहे हैं, और यह सवाल खुद राजस्थान BJP अध्यक्ष ने उठाया है। उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा किया कि दुबई और पाकिस्तान से जंतर-मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों के लिए खाने के ऑर्डर दिए जा रहे हैं। यह दावा अगर सच है, तो यह महज एक छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक खेल है जिसमें विदेशी हाथ भी शामिल हो सकते हैं।

CJP यानी Citizens for Justice and Peace, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर डटी हुई है। संगठन का कहना है कि जब तक प्रधान पद नहीं छोड़ते, वे वहाँ से नहीं हटेंगे। लेकिन BJP इस पूरे आंदोलन की नीयत और फंडिंग पर सीधे सवाल खड़े कर रही है, और राजस्थान BJP अध्यक्ष का बयान उसी रणनीति का हिस्सा है।

जंतर-मंतर पर हालात और भी जटिल हो गए जब प्रदर्शन के दौरान धार्मिक नारे लगाए गए और निहंगों ने हथियार लहराए। इससे यह सवाल और पुख्ता होता है कि क्या यह आंदोलन हाईजैक हो चुका है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुई हैं, जिससे राजधानी में तनाव का माहौल बना हुआ है।

NEET पेपर लीक एक वास्तविक और गंभीर मुद्दा है — लाखों भारतीय छात्रों का भविष्य दाँव पर है, और उनकी पीड़ा असली है। लेकिन जब किसी जायज़ आंदोलन में विदेशी फंडिंग के संकेत मिलें, जब धार्मिक उन्माद घुसाया जाए, और जब पाकिस्तान जैसे देश से कनेक्शन की बात सामने आए — तो देशभक्त नागरिक का फर्ज़ बनता है कि वह इन सवालों को नज़रअंदाज़ न करे।

भारत का युवा स्मार्ट है, जागरूक है। वह जानता है कि असली लड़ाई शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की है — न कि किसी विदेशी एजेंडे का मोहरा बनने की। NEET सुधार की माँग करो, जवाबदेही तय करो — लेकिन यह भी देखो कि तुम्हारे कंधे पर बंदूक रखकर कौन चला रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान के बचाव में BJP का उतरना राजनीतिक रूप से अपेक्षित था, लेकिन दुबई-पाकिस्तान वाला दावा एक नई और गंभीर दिशा खोलता है जिसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए। अगर यह साबित होता है, तो यह सिर्फ एक प्रदर्शन का मामला नहीं रहेगा — यह राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न बन जाएगा। और तब जवाब देना होगा — सिर्फ सरकार को नहीं, उन सभी को जो इस आंदोलन की आड़ में अपना खेल खेल रहे हैं।

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