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भारत-अफगानिस्तान से दोहरी जंग, बलूचिस्तान-KPK में विद्रोह — क्या पाकिस्तान में लगने वाला है National Emergency?

भारत-अफगानिस्तान से दोहरी जंग, बलूचिस्तान-KPK में विद्रोह — क्या पाकिस्तान में लगने वाला है National Emergency?

पाकिस्तान में आपातकाल की आहट

इस्लामाबाद — पाकिस्तान में राष्ट्रीय आपातकाल लगने की आशंका अब सिर्फ अटकलें नहीं रहीं। नवाज शरीफ के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व खेल प्रशासक नजम सेठी ने एक टीवी प्रोग्राम में खुलकर कहा कि पाकिस्तान तेजी से National Emergency की ओर बढ़ रहा है। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पाकिस्तान एक साथ कई मोर्चों पर बुरी तरह घिरा हुआ है — भारत से सीमा तनाव, अफगानिस्तान से सशस्त्र संघर्ष, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) में जारी विद्रोह, और एक ऐसी अर्थव्यवस्था जो IMF की खैरात पर टिकी है। पाकिस्तान का यह संकट अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहाँ उसके अपने ही नेता संवैधानिक आपातकाल को एकमात्र रास्ता बता रहे हैं।

नजम सेठी का दावा — “Emergency लगना तय है”

नजम सेठी ने अपने टीवी शो में बेबाकी से कहा, “मेरा मानना है कि राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जाने वाला है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गवर्नर शासन वाली इमरजेंसी नहीं होगी, बल्कि एक पूर्ण राष्ट्रीय आपातकाल होगा जो संघीय सरकार को देश का संपूर्ण नियंत्रण देगा। उनके मुताबिक, इस कदम के पीछे तीन बड़े कारण हैं — पहला, बड़े पैमाने पर फैला आतंकवाद; दूसरा, अफगानिस्तान और भारत से एक साथ बढ़ता सैन्य दबाव; और तीसरा, KPK की प्रांतीय सरकार का संघीय सुरक्षा अभियानों में असहयोग। सेठी ने यह भी कहा कि जब राष्ट्रीय आपातकाल लागू होता है, तो पूरा देश केंद्र के नियंत्रण में आ जाता है — कोई भी नियुक्ति या बर्खास्तगी बिना रोक-टोक के हो सकती है।

भारत और अफगानिस्तान — दो मोर्चों पर घिरा पाकिस्तान

पाकिस्तान की स्थिति को समझना हो तो एक बात साफ है — वह खुद अपनी नीतियों का शिकार बन चुका है। भारत पहले ही Operation Sindoor के जरिए यह संदेश दे चुका है कि आतंक का जवाब सीधे दिया जाएगा। अब तालिबान शासित अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान के खिलाफ व्यावहारिक रूप से युद्ध की घोषणा कर दी है — सीमा पर गोलाबारी और TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) को मिल रहे अफगान समर्थन के रूप में। सेठी ने टीवी पर इसे सीधे शब्दों में कहा: “अफगानिस्तान ने आपके खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी है; भारत पहले ही यह घोषणा कर चुका है।” पाकिस्तान की सेना दो अलग-अलग दिशाओं में खिंची हुई है, और यह किसी भी देश के लिए रणनीतिक रूप से विनाशकारी स्थिति होती है।

बलूचिस्तान और KPK — अंदर से जल रहा पाकिस्तान

बाहरी दुश्मनों से भी बड़ा खतरा पाकिस्तान को भीतर से है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पिछले कुछ महीनों में अपने हमले इस कदर बढ़ा दिए हैं कि पाकिस्तानी सेना को खुलकर स्वीकार करना पड़ा है कि हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं। KPK में हर दिन आतंकवादी घटनाएं हो रही हैं, और वहाँ की PTI-समर्थित प्रांतीय सरकार पर आरोप है कि वह संघीय सुरक्षा बलों के साथ सहयोग नहीं कर रही। सेठी ने बताया कि KPK पुलिस आतंकवाद-रोधी अभियानों में काम नहीं कर रही, जिससे संघीय सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। सिंध में प्रांतीय विभाजन की मांग को लेकर भी हालात तनावपूर्ण हैं। यानी पाकिस्तान के चारों प्रमुख सूबे किसी न किसी रूप में संघर्ष में हैं।

पाकिस्तान में आपातकाल का इतिहास

नजम सेठी ने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान में राष्ट्रीय आपातकाल कोई नई बात नहीं है — यह देश इस रास्ते से कई बार गुजर चुका है। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान आपातकाल लगाया गया जो फरवरी 1969 तक — यानी लगभग चार साल तक — चला, और इसी दौरान अयूब खान की सत्ता का अंत हुआ। 1971 में याह्या खान ने फिर आपातकाल लगाया, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया — पाकिस्तान के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय। जुल्फिकार अली भुट्टो ने 1971 से जुलाई 1977 तक उसी आपातकाल के साये में शासन किया, जिसके दौरान मौलिक अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता व्यावहारिक रूप से निलंबित रहे। 5 जुलाई 1977 को जनरल जिया-उल-हक ने तख्तापलट कर मार्शल लॉ लागू किया, और आपातकाल की जरूरत ही खत्म हो गई।

1998 और 2007 — आधुनिक पाकिस्तान के दो और संकट

सेठी ने आगे बताया कि 1998 में नवाज शरीफ के कार्यकाल में भारत के परमाणु परीक्षणों के जवाब में पाकिस्तान ने भी परमाणु परीक्षण किए और इसके बाद विदेशी मुद्रा संकट से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करना पड़ा — सरकार ने नागरिकों के बैंक खातों में जमा विदेशी मुद्रा तक जब्त कर ली। इसके बाद 3 नवंबर 2007 को जनरल परवेज मुशर्रफ ने Provisional Constitutional Order (PCO) लागू किया, जो 15 दिसंबर 2007 तक चला। यानी पाकिस्तान का पूरा राजनीतिक इतिहास बताता है कि जब भी शासन व्यवस्था चरमराई, आपातकाल एक आसान हथियार बन गया। आज 2025 में पाकिस्तान जिस दोहरे बाहरी और आंतरिक दबाव में है, वह उन सभी पिछले संकटों से कहीं अधिक जटिल और गहरा है — और भारत के नजरिए से यह पड़ोसी देश की बढ़ती कमजोरी का स्पष्ट संकेत है।

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