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8वां वेतन आयोग से परे: J&K में OPS की वापसी और TET छूट — सरकारी कर्मचारियों के लिए गेम-चेंजर

8वां वेतन आयोग से परे: J&K में OPS की वापसी और TET छूट — सरकारी कर्मचारियों के लिए गेम-चेंजर

जम्मू-कश्मीर से दो ऐसी खबरें आई हैं जो लाखों सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों की जिंदगी बदल सकती हैं। यह सिर्फ एक प्रशासनिक अपडेट नहीं — यह एक बड़ा सिग्नल है।

पहली बात करें तो जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आधिकारिक आदेश जारी किए हैं जिनके तहत 24 दिसंबर 2009 से पहले विज्ञापित या अधिसूचित पदों पर चयनित सरकारी कर्मचारियों को नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) में वापस जाने की अनुमति दी गई है। यह कट-ऑफ डेट महज एक तारीख नहीं है — यह वो ऐतिहासिक क्षण है जब J&K में NPS को औपचारिक रूप से अपनाया गया था, जबकि तब भी यह क्षेत्र अपने खुद के संविधान के तहत संचालित हो रहा था। उस दौर के कर्मचारियों ने NPS को कभी अपनी मर्जी से नहीं चुना था — और अब सरकार ने यह माना है।

2019 में J&K के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से यह पहली बार है जब इतना ठोस प्रशासनिक कदम उठाया गया है। दिल्ली के सरकारी कर्मचारी, जो जून 2004 से पहले विज्ञापित पदों पर नियुक्त हुए थे, वर्षों से अदालतों में NPS से OPS में जाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। J&K का यह फैसला उनके लिए एक मजबूत precedent बन गया है — एक ऐसा हथियार जो कोर्टरूम में भी काम आएगा और राजनीतिक दबाव बनाने में भी।

दूसरा बड़ा घटनाक्रम शिक्षा के मोर्चे पर है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने 24 और 25 सितंबर के बीच एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया जिसका मकसद ‘रहबर-ए-तालीम’ (ReT) स्कीम के तहत नियुक्त शिक्षकों को अनिवार्य Teacher Eligibility Test (TET) पास करने की शर्त से छूट दिलाना है। ये वो शिक्षक हैं जिन्होंने सालों तक J&K के दूरदराज इलाकों में बच्चों को पढ़ाया, जब शिक्षा का ढांचा खड़ा करना ही सबसे बड़ी चुनौती थी। अब उन्हीं से TET की मांग करना — एक ऐसे टेस्ट की जो 2009 के RTE Act के बाद अनिवार्य हुई — न्यायसंगत नहीं लगता।

हालांकि, J&K के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे में विधानसभा का प्रस्ताव तब तक कानूनी रूप से लागू नहीं होगा जब तक उपराज्यपाल की औपचारिक मंजूरी और केंद्रीय गृह मंत्रालय की अंतिम स्वीकृति न मिले। यह एक असली अड़चन है। लेकिन राजनीतिक संदेश साफ है — निर्वाचित सरकार अपने शिक्षकों के साथ खड़ी है, और यह साहस पूरे देश में गूंजेगा।

राष्ट्रीय संदर्भ में देखें तो यह प्रस्ताव उन लाखों शिक्षकों की आवाज को बल देता है जिनकी नियुक्ति RTE Act 2009 से पहले हुई थी और जो सुप्रीम कोर्ट के सख्त TET फैसलों की जद में आ गए। भारत के कई राज्यों में ऐसे शिक्षक हैं जो वर्षों से कक्षाएं संभाल रहे हैं लेकिन नौकरी की अनिश्चितता में जी रहे हैं। J&K विधानसभा का यह कदम उन राज्य सरकारों को भी प्रेरित कर सकता है जो अब तक इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठी थीं।

भारत जब अपनी demographic dividend की बात करता है, जब हम कहते हैं कि हमारी युवा शक्ति ही हमारी असली ताकत है, तो उस ताकत को तराशने वाले शिक्षकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी बनती है। OPS की वापसी और TET छूट — ये दोनों फैसले इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। अब देखना यह है कि केंद्र इस संकेत को कितनी जल्दी पढ़ता है और बाकी राज्य कब इस रास्ते पर चलते हैं।

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