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‘अराजकता फैलाना किसी का अधिकार नहीं’ — राजनाथ सिंह ने जागरण साहित्य सृजन सम्मान में Gen Z को बताया भारत की असली ताकत

'अराजकता फैलाना किसी का अधिकार नहीं' — राजनाथ सिंह ने जागरण साहित्य सृजन सम्मान में Gen Z को बताया भारत की असली ताकत

नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक साहित्यिक संध्या में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वह बात कह दी जो हर देशभक्त भारतीय के मन में थी — देश में अराजकता फैलाना किसी का अधिकार नहीं है।

यह क्षण था दैनिक जागरण साहित्य सृजन सम्मान समारोह का, जो दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक और यशस्वी लेखक नरेन्द्र मोहन की जयंती पर आयोजित किया गया। इस गरिमामय अवसर पर वरिष्ठ कवि और साहित्यकार बुद्धिनाथ मिश्र को 11 लाख रुपये की सम्मान राशि और स्मृति चिह्न से सम्मानित किया गया — एक ऐसे साहित्यकार को, जिन्होंने हिंदी साहित्य की जड़ों को सींचने में दशकों लगाए।

समारोह की शुरुआत में राजनाथ सिंह ने नरेन्द्र मोहन जी के उस ऐतिहासिक साहस को याद किया जब 1975 के आपातकाल में उन्होंने संपादकीय में लिखा — “नया लोकतंत्र? सेंसर लागू, शांत रहें!” — और बाकी कॉलम जानबूझकर खाली छोड़ दिया। वह खालीपन महज कागज नहीं था, वह अभिव्यक्ति की आजादी पर लगी जंजीरों के खिलाफ एक मूक लेकिन गर्जनापूर्ण विरोध था। रक्षा मंत्री ने कहा कि दैनिक जागरण आज भी उन्हीं मूल्यों और आदर्शों के साथ आगे बढ़ रहा है।

इसके बाद राजनाथ सिंह ने पीढ़ियों के बदलाव पर एक गहरी और दूरदर्शी बात कही। उन्होंने कहा कि Generation Confluence — यानी कई पीढ़ियों का संगम — कोई टकराव नहीं, बल्कि ज्ञान, इनोवेशन और प्रगति का आधार है। 1947 में ट्रांजिस्टर के आविष्कार से लेकर 1950 में एलन ट्यूरिंग के Turing Test के विचार तक — हर पीढ़ी की खोज ने अगली पीढ़ी के लिए रास्ता बनाया। आज वही सफर Artificial Intelligence के युग तक पहुंचा है।

Gen Z की बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पीढ़ी इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बीच पली-बढ़ी है — संवाद का तरीका बदला है, मनोरंजन का तरीका बदला है। लेकिन साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि Gen Z बहुत जागरूक है और राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य से उसे कभी नहीं भटकाया जा सकता। पश्चिमी हितों द्वारा थोड़े समय के लिए भ्रमित किया जा सकता है, लेकिन भारत का युवा अपनी जिम्मेदारी भली-भांति जानता है।

सोशल मीडिया के खतरों पर भी राजनाथ सिंह ने बेबाकी से बात की। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बंद कर दिया है और भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी न्यूनतम आयु निर्धारित करने की बात कही है। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार इस दिशा में उचित कदम उठाएगी, चाहे कुछ लोग इसका विरोध करें — युवाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि Critical Thinking, Creativity और Problem Solving को बढ़ावा देना इसीलिए जरूरी है ताकि भारत का युवा केवल job seeker न रहे, बल्कि job creator और अगली पीढ़ी का नेता बने। AI के दौर में वही आगे बढ़ेगा जो अनिश्चितता में निर्णय ले सके, लोगों को साथ लेकर चल सके और बदलाव को अपनाने का साहस रखे।

समारोह का समापन एक शाश्वत संदेश के साथ हुआ — भविष्य को इनोवेशन की जरूरत है, लेकिन उसे अतीत की समझदारी की भी उतनी ही जरूरत है। युवा पीढ़ी और अनुभवी पीढ़ी को एक-दूसरे को समझना होगा, सम्मान देना होगा — क्योंकि भारत का सुनहरा भविष्य इसी संगम में छुपा है।

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