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नई दिल्ली में BRICS का जादू: ईरान-UAE के बीच बर्फ पिघली, पेजेश्कियान बोले — ‘अब साथ मिलकर भविष्य बनाएंगे’

नई दिल्ली में BRICS का जादू: ईरान-UAE के बीच बर्फ पिघली, पेजेश्कियान बोले — 'अब साथ मिलकर भविष्य बनाएंगे'

नई दिल्ली ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत सिर्फ एक मेजबान नहीं, बल्कि एक global diplomatic force है। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन (12-13 सितंबर, 2026) के दौरान जहाँ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं एक मंच पर आईं, वहीं इस summit के साये में एक और बड़ा diplomatic breakthrough हुआ — ईरान और UAE के बीच महीनों की कड़वाहट के बाद पहली उच्चस्तरीय बातचीत संपन्न हुई। यह वही मंच था जिसे भारत ने तैयार किया, और यही है असली Vishwaguru का अर्थ।

क्या हुआ BRICS Summit में?

शनिवार, 12 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS Summit के पहले दिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। पश्चिम एशिया में संघर्ष की शुरुआत के बाद से यह दोनों देशों के बीच अब तक की सबसे उच्चस्तरीय मुलाकात थी, जो इस बात का प्रमाण है कि जब सही मंच मिले, तो कूटनीति चमत्कार कर सकती है। अगले दिन रविवार को राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने न्यूज एजेंसी AFP से बातचीत में इस मुलाकात के नतीजों का खुलासा किया।

पेजेश्कियान ने क्या कहा?

ईरानी राष्ट्रपति के शब्द सीधे और साफ थे — “युद्ध और Persian Gulf में हुई घटनाओं के बाद पहली बार मेरी अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के साथ रचनात्मक बातचीत हुई, और हमारे बीच यह सहमति बनी कि हम बीती बातों को पीछे छोड़कर आगे की तरफ देखें और एक साथ मिलकर अपना भविष्य बनाएं।” यह बयान महज diplomatic courtesy नहीं है — यह उस गहरी खाई को पाटने की शुरुआत है जो इस साल की शुरुआत में खुली थी।

पृष्ठभूमि: कैसे बिगड़े थे ईरान-UAE के रिश्ते?

इस diplomatic thaw को समझने के लिए context जरूरी है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया, जिसका सीधा असर UAE पर पड़ा। इससे भड़के UAE ने अगस्त 2026 में ऐलान किया कि वह ईरान के साथ trade और financial exchanges को suspend कर रहा है — यह एक बड़ा आर्थिक झटका था, क्योंकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से मजबूत व्यापारिक संबंध रहे हैं।

भारत का role: सिर्फ मेजबान नहीं, mediator

यह coincidence नहीं है कि ईरान और UAE के बीच यह breakthrough नई दिल्ली में हुई। BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच को host करने की India की क्षमता उसे एक unique position देती है — वह न अमेरिकी camp में है, न चीनी, और इसीलिए Global South के देश भारत पर भरोसा करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की “Vasudhaiva Kutumbakam” की philosophy सिर्फ नारा नहीं, यह एक working foreign policy doctrine बन चुकी है, जिसके नतीजे दुनिया देख रही है।

BRICS 2026 का असली legacy शायद economic declarations नहीं, बल्कि यह होगा कि नई दिल्ली की गलियों में दो दुश्मन देशों ने एक-दूसरे का हाथ थामा — और यह हुआ भारत की diplomatic छत्रछाया में। यही है नया भारत: न सिर्फ rising power, बल्कि एक responsible, trusted global leader।

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