दिल्ली दौरे पर बांग्लादेश की शर्त
ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत का दौरा करने के इच्छुक हैं, लेकिन उनकी एक स्पष्ट शर्त है — दिल्ली आने से पहले द्विपक्षीय एजेंडा पूरी तरह तय होना चाहिए, ताकि वे ढाका लौटकर अपने देश के लोगों को कोई ठोस उपलब्धि दिखा सकें। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के एक वरिष्ठ राजनयिक सूत्र ने यह जानकारी दी है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब भारत ने तारिक को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रण भेजा था, जिसे बांग्लादेश ने अस्वीकार कर दिया है।
बीते एक महीने से भी अधिक समय से तारिक रहमान के संभावित भारत दौरे को लेकर अटकलों का बाजार गर्म था। एक तरफ बांग्लादेश सरकार भारत के साथ बेहतर संबंधों की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ शेख हसीना के दिल्ली में शरण लेने के मुद्दे पर वह सख्त रुख भी अपनाए हुए है। इस कशमकश में तारिक रहमान की राजनीतिक स्थिति नाजुक दिखती है — वे भारत से रिश्ते सुधारना चाहते हैं, पर घरेलू राजनीति की कीमत पर नहीं।
भारत के साथ रिश्ते — मजबूरी नहीं, रणनीति
बांग्लादेशी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि BRICS समिट में तारिक रहमान की अनुपस्थिति का यह मतलब कतई नहीं है कि वे भारत जैसे अहम पड़ोसी से दूरी बनाना चाहते हैं। रहमान खुद इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि नवंबर या दिसंबर तक उन्हें द्विपक्षीय वार्ता के लिए नई दिल्ली आना पड़ सकता है, क्योंकि गंगा जल संधि का नवीनीकरण एक अनिवार्य और समयबद्ध मुद्दा है जिसे टाला नहीं जा सकता। यह संधि तीन दशकों से दोनों देशों के बीच जल-बंटवारे की आधारशिला रही है, और इसके नवीनीकरण पर ढाका की स्पष्ट उम्मीदें हैं।
अधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि रहमान के दौरे से पहले दोनों देशों के नौकरशाहों के स्तर पर गहन बैठकें होनी चाहिए, जो अभी तक शुरू नहीं हुई हैं। ढाका की मांग है कि एजेंडा पहले से तय हो, ताकि यात्रा महज एक औपचारिकता न बनकर रह जाए, बल्कि उसके ठोस और मापनीय परिणाम निकलें।
गंगा जल संधि और अटके द्विपक्षीय मुद्दे
बांग्लादेशी अधिकारी के अनुसार, गंगा जल संधि के अलावा भी ऐसे कई क्षेत्र हैं जहाँ भारत-बांग्लादेश संबंध वर्षों से अटके पड़े हैं। इन मुद्दों पर सार्थक प्रगति के बिना किसी भी शिखर-स्तरीय यात्रा का कोई विशेष अर्थ नहीं होगा। ढाका ने संकेत दिया है कि कुछ मुद्दों पर वह अपना रुख लचीला कर सकता है, जबकि कुछ मुद्दों पर वह दृढ़ता से अपनी माँग रखेगा — यह कूटनीतिक संतुलन की साफ झलक है।
भारत की सक्रिय कूटनीति
भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ढाका में सक्रिय रूप से वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं, जिनमें नए राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर भी शामिल हैं। यह भारत की उस रणनीतिक सोच का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों को मजबूत आधार देना चाहता है, खासकर तब जब बांग्लादेश में नया राजनीतिक नेतृत्व स्थापित हो रहा है। भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत बांग्लादेश एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है, और नई दिल्ली इस रिश्ते को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहती।
बांग्लादेशी अधिकारी ने अंत में कहा कि तारिक रहमान की यात्रा की योजना इस प्रकार बनाई जानी चाहिए कि दोनों देशों के संबंध अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सकें। साफ है कि भारत और बांग्लादेश दोनों ही इस रिश्ते को नई ऊँचाई देने के इच्छुक हैं — बस जरूरत है एक ठोस, नतीजे-केंद्रित कूटनीतिक प्रक्रिया की, जो अभी अपने प्रारंभिक चरण में भी नहीं पहुँची है।

