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झारखंड में AI क्रांति: 11 डेटा और AI लैब्स को मंजूरी, युवाओं के लिए खुला भविष्य का दरवाज़ा

झारखंड में AI क्रांति: 11 डेटा और AI लैब्स को मंजूरी, युवाओं के लिए खुला भविष्य का दरवाज़ा

कुछ साल पहले तक झारखंड का नाम सुनते ही ज़हन में आता था — खनिज संपदा, जंगल, और विकास की धीमी रफ्तार। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन के तहत केंद्र सरकार ने झारखंड के ITI और पॉलिटेक्निक संस्थानों में 11 डेटा और AI लैब्स को हरी झंडी दे दी है — और यह सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि लाखों झारखंडी युवाओं के लिए एक नई शुरुआत है।

यह सब शुरू हुआ राज्यसभा के सत्र से। राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने सदन में झारखंड में AI और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर सवाल उठाया। जवाब दिया केंद्रीय IT राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने — और उनका जवाब उम्मीद से कहीं बड़ा निकला।

मंत्री ने बताया कि इंडिया AI मिशन के तहत झारखंड को न केवल 11 डेटा और AI लैब्स मिले हैं, बल्कि राज्य में क्षेत्रीय AI इनोवेशन इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए दो AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी मंज़ूर किए गए हैं — और यह India AI Startup Financing Pillar के अंतर्गत आता है। इसके साथ ही AI रिसर्च में लगे undergraduate, postgraduate और doctoral scholars को फेलोशिप भी दी जाएगी। झारखंड को अब तक कुल 8 फेलोशिप मिल चुकी हैं, जिनमें 2 स्नातक और 6 PhD रिसर्च फेलोशिप शामिल हैं।

यह momentum यूं ही नहीं बना।

परिमल नथवाणी मूल रूप से गुजरात के हैं, लेकिन झारखंड से उनका रिश्ता दशकों पुराना है। साल 2008 में उन्होंने पहली बार झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव लड़ा और cross-voting के ज़रिए 21 वोट हासिल करते हुए UPA समर्थित उम्मीदवार को हराया। वह जीत किसी को चौंकाने वाली थी — एक कारोबारी जगत की बड़ी हस्ती, जिसने राजनीति में भी अपनी ज़मीन बना ली।

2014 में उन्होंने फिर झारखंड से जीत दर्ज की। लगातार दूसरी बार। अलग-अलग दलों के विधायकों ने एक बार फिर party line से ऊपर उठकर उन्हें समर्थन दिया — यही नथवाणी की असली ताकत है। जून 2020 में उन्होंने आंध्र प्रदेश से YSRCP उम्मीदवार के रूप में तीसरी बार राज्यसभा में प्रवेश किया, इस बार एक अलग राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए। और अब 2026 में वे झारखंड से चौथी बार राज्यसभा पहुंचे हैं — 81 सदस्यीय विधानसभा में जीत के लिए 28 वोट चाहिए थे, और नथवाणी को ठीक 28 valid votes मिले। Congress के प्रणव झा 20 वोट पर ही रुक गए।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नथवाणी की सबसे बड़ी asset है उनकी सभी दलों से दोस्ती — वर्षों की मेहनत से बनाया गया एक ऐसा नेटवर्क जो ideological boundaries को पार करता है। अपने पिछले कार्यकालों में उन्होंने सड़क, बिजली, आदिवासी कल्याण और बुनियादी ढांचे के मुद्दे उठाए, MP fund से गांवों में सड़कें और community buildings बनवाईं।

और अब उनके सवाल ने झारखंड को AI युग में एक बड़ा push दे दिया है।

सोचिए — जिस राज्य के युवाओं को कल तक रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों की तरफ देखना पड़ता था, वहां अब Artificial Intelligence की लैब्स खुल रही हैं। ITI और पॉलिटेक्निक — जो traditionally blue-collar training के केंद्र माने जाते थे — अब AI और data science का हब बनने की राह पर हैं। यह सिर्फ infrastructure नहीं, यह एक पूरी generation की trajectory बदलने का मौका है। Bharat का tech revolution अब सिर्फ Bengaluru या Hyderabad तक सीमित नहीं — यह Ranchi तक पहुंच रहा है।

झारखंड की माटी में खनिज तो पहले से थे। अब यहां के बच्चों के हाथों में AI का हथियार भी होगा।

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