उत्तर प्रदेश आज जिस रफ्तार से अपना इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रहा है, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में यमुना एक्सप्रेसवे से लेकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक, यूपी ने साबित किया है कि भारत का दिल अब सिर्फ दिल्ली में नहीं धड़कता। और अब इसी कड़ी में एक ऐसा प्रोजेक्ट सामने आया है जो यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर इतिहास का सबसे बड़ा अध्याय बन सकता है।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) ने राज्य सरकार को एक नए एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव भेजा है — ग्रेटर नोएडा से सीधे बलिया तक, 1047 किलोमीटर लंबा, 8-लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹30,000 करोड़ है।
इस पूरे प्रोजेक्ट की शुरुआत ग्रेटर नोएडा के सिरसी गांव से होगी। यहाँ से एक्सप्रेसवे बुलंदशहर, अलीगढ़, बदायूं, कांशीराम नगर (कासगंज), फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़, प्रयागराज, संत रविदास नगर, मिर्जापुर, वाराणसी और गाजीपुर से होते हुए अंततः बलिया तक पहुंचेगा। बलिया के फेफना के निकट स्टेट हाईवे-34 से इसे जोड़ने की योजना है। कुल मिलाकर यह एक्सप्रेसवे 17 जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा।
यह सिर्फ यूपी की बात नहीं है। बलिया बिहार की सीमा से सटा हुआ जिला है, इसलिए बिहार के कई जिलों को भी इस एक्सप्रेसवे का सीधा फायदा मिलेगा। पूर्वांचल की आर्थिक धमनी के रूप में यह सड़क लाखों लोगों की ज़िंदगी बदल सकती है।
मेन एक्सप्रेसवे के साथ-साथ तीन लिंक एक्सप्रेसवे भी प्रस्तावित हैं। फर्रुखाबाद के लिए 19.215 किलोमीटर का पहला लिंक, लखनऊ के लिए 90.22 किलोमीटर का दूसरा लिंक, और मिर्जापुर के लिए 13.551 किलोमीटर का तीसरा लिंक — इन तीनों की कुल लंबाई 123 किलोमीटर होगी। यानी असल में यह नेटवर्क 1047 किलोमीटर से भी कहीं आगे जाता है।
इंजीनियरिंग के नज़रिए से यह प्रोजेक्ट किसी चुनौती से कम नहीं। UPEIDA के अनुसार एक्सप्रेसवे पर 39 बड़े पुल और 199 छोटे पुल बनाए जाएंगे। गंगा नदी पर चार अलग-अलग पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। रेलवे क्रॉसिंग पर 27 रेल ओवरब्रिज (ROB) बनेंगे। वाहनों की आवाजाही के लिए 187 वेहिकुलर अंडरपास और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए 244 पेडेस्ट्रियन अंडरपास प्रस्तावित हैं। इसके अतिरिक्त 25 इंटरचेंज, 23 फ्लाईओवर और 1248 कल्वर्ट भी इस परियोजना का हिस्सा होंगे।
ज़मीन अधिग्रहण इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा पहलू होगा। मुख्य एक्सप्रेसवे और तीनों लिंक एक्सप्रेसवे के लिए मिलाकर करीब 15,120 हेक्टेयर ज़मीन अधिग्रहित करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर लैंड पार्सल विकसित करने के लिए अतिरिक्त 11,254 हेक्टेयर ज़मीन की आवश्यकता बताई गई है। इस परियोजना के लिए 1,949 गांवों को अधिसूचित किया जा चुका है।
फिलहाल यह एक्सप्रेसवे प्रस्तावित अवस्था में है और राज्य सरकार की मंजूरी का इंतजार है। लेकिन जिस तरह से यूपी ने पिछले वर्षों में एक के बाद एक एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को ज़मीन पर उतारा है, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि नया भारत सड़कों पर दौड़ रहा है — और उस दौड़ में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है।

