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यूट्यूबर ध्रुव राठी को साकेत कोर्ट का समन: 8 साल पुराने मानहानि केस में 17 अक्टूबर को होगी सुनवाई

यूट्यूबर ध्रुव राठी को साकेत कोर्ट का समन: 8 साल पुराने मानहानि केस में 17 अक्टूबर को होगी सुनवाई

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने जारी किए नए समन

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ वर्ष 2018 से लंबित आपराधिक मानहानि मामले में नए समन जारी करने का आदेश दिया है। यह कानूनी पेचीदगी उनके चर्चित वीडियो ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट-2’ से जुड़ी है, जिसे लेकर शिकायतकर्ता विकास सांकृत्यायन उर्फ विकास पांडे ने राठी पर झूठी और मनगढ़ंत कहानी गढ़कर छवि खराब करने का आरोप लगाया था। अगली सुनवाई 17 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

नोटिस देने की पूरी कहानी

दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट सुशांत कुमार ने ध्रुव राठी के गुरुग्राम स्थित आवास पर पहुंचकर यह नोटिस देने की कोशिश की। एडवोकेट के मुताबिक, राठी को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने नोटिस लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद सोसायटी के सिक्योरिटी गार्ड की मदद से घर के बाहर नोटिस चस्पा करना पड़ा।

शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि 2019 से ही समन की तामील कराने में बार-बार अड़चनें आती रहीं। राठी के भारत लौटने के बाद इस बार नोटिस देने का प्रयास किया गया।

कोर्ट ने दी प्रोसेस सर्वर के साथ जाने की अनुमति

अदालत ने शिकायतकर्ता को प्रोसेस सर्वर के साथ जाकर समन की विधिवत तामील कराने की अनुमति दे दी है, ताकि आरोपी तक समन सही तरीके से पहुंचाया जा सके। जुलाई 2024 में भी जिला जज गुंजन गुप्ता की अदालत ने राठी को समन और नोटिस जारी किए थे, लेकिन तब भी मामला अटका रहा।

एक से ज्यादा कानूनी मोर्चों पर घिरे राठी

यह ध्रुव राठी के खिलाफ अकेला मामला नहीं है। वकील अमिता सचदेवा ने साकेत कोर्ट में एक अलग मानहानि का मुकदमा दायर किया है, जिसमें भविष्य में ऐसे कंटेंट पर रोक और हर्जाने की मांग की गई है। इसके अलावा धार्मिक टिप्पणी से जुड़े अन्य मामले भी उनके खिलाफ विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं।

सबसे बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ध्रुव राठी को हिरासत में लिया — यह खबर सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गई और बड़े पैमाने पर बहस छिड़ गई।

आगे क्या?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राठी समन की तामील से बचते रहे, तो अदालत अगले चरण में और कड़े कदम उठा सकती है। 17 अक्टूबर 2026 की सुनवाई इस पूरे मामले में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। भारत के डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह केस एक बड़ा संकेत है कि ऑनलाइन कंटेंट की जवाबदेही से कोई नहीं बच सकता — चाहे subscriber count करोड़ों में ही क्यों न हो।

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