बीजिंग के सत्ता के गलियारों में एक अजीब सन्नाटा पसरा है।
चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने सोमवार को एक ऐसा फैसला सुनाया जिसने पूरी दुनिया के रणनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया — सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के पूर्व उपाध्यक्ष झांग यूशिया और पूर्व संयुक्त स्टाफ प्रमुख लियू झेनली को पार्टी और सेना, दोनों से औपचारिक रूप से बाहर कर दिया गया। दोनों पर भ्रष्टाचार, पार्टी के प्रति बेवफाई, गुटबाजी और गंभीर अनुशासन उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। यह महज एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है — यह शी जिनपिंग के उस ‘सफाई अभियान’ की सबसे बड़ी कड़ी है जो चीन की People’s Liberation Army (PLA) की नींव को हिला रहा है।
झांग यूशिया कोई साधारण अधिकारी नहीं थे। CMC का उपाध्यक्ष पद चीन की सैन्य संरचना में राष्ट्रपति के ठीक नीचे आता है — और झांग को दशकों से शी जिनपिंग के सबसे भरोसेमंद सैन्य सहयोगियों में गिना जाता था। वह कम्युनिस्ट पार्टी के पोलितब्यूरो के सदस्य भी रहे और उन गिने-चुने चीनी जनरलों में से एक थे जिन्हें वास्तविक युद्ध का अनुभव था — 1979 के Sino-Vietnamese युद्ध में उनकी भागीदारी उन्हें एक अलग कद देती थी। लियू झेनली भी CMC के सदस्य के रूप में संयुक्त स्टाफ विभाग की कमान संभाल चुके थे, यानी PLA के ऑपरेशनल प्लानिंग के केंद्र में बैठे थे।
जांच की शुरुआत इस साल जनवरी में घोषित हुई थी, और अगस्त के अंत में दोनों को CMC से हटा दिया गया था। लेकिन सोमवार की कार्रवाई ने मामले को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया — चीन ने दोनों के खिलाफ कथित आपराधिक मामलों को सैन्य अभियोजन एजेंसियों को सौंप दिया है। अब यह केवल पार्टी अनुशासन की कार्रवाई नहीं रहेगी, बल्कि एक आपराधिक मुकदमे की शक्ल लेगी।
चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार दोनों पर पद का दुरुपयोग कर अधिकारियों की पदोन्नति के बदले बड़ी रकम लेने, महंगे गिफ्ट और कैश स्वीकार करने, और अपने परिवार व करीबियों पर नियंत्रण न रखने के आरोप हैं। लेकिन जो बात इस मामले को असाधारण बनाती है, वह है बेवफाई और गुटबाजी के आरोप — Reuters के अनुसार विशेषज्ञ मानते हैं कि चीनी राजनीति में ये आरोप असामान्य रूप से कड़े और politically explosive माने जाते हैं।
शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान को अपनी सत्ता के केंद्र में रखा है। नौकरशाही से लेकर PLA तक, सैकड़ों अधिकारी इसकी चपेट में आ चुके हैं। लेकिन झांग और लियू जैसे नामों का इस सूची में आना — जो कभी जिनपिंग के inner circle का हिस्सा माने जाते थे — यह संकेत देता है कि चीन की सेना के भीतर सत्ता का खेल कहीं अधिक जटिल और अस्थिर है जितना बाहर से दिखता है।
सात सदस्यीय CMC में अब बचे सिर्फ दो
लगातार हो रही बर्खास्तगियों के बाद चीन के सात सदस्यीय सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में अब केवल दो सक्रिय सदस्य बचे हैं — और उनमें से एक खुद शी जिनपिंग हैं। यह आंकड़ा अपने आप में PLA के भीतर व्याप्त अस्थिरता की गंभीरता बयान करता है। यह कार्रवाई ऐसे नाजुक समय में हुई है जब शी जिनपिंग की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संभावित मुलाकात क्षितिज पर है और अक्टूबर में कम्युनिस्ट पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है — ऐसे में आंतरिक अनुशासन और नियंत्रण का यह प्रदर्शन जिनपिंग की रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
भारत के नजरिए से देखें तो यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है। LAC पर चीन की सैन्य गतिविधियों की निगरानी करने वाले भारतीय रणनीतिकारों के लिए PLA का यह आंतरिक उथल-पुथल एक संकेत है कि चीन की सैन्य मशीनरी उतनी monolithic और अजेय नहीं है जितनी वह दिखने की कोशिश करती है। जब एक देश अपने सबसे ताकतवर जनरलों पर ही बेवफाई का इल्जाम लगाए, तो उसकी आंतरिक एकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
झांग यूशिया और लियू झेनली की कहानी अभी खत्म नहीं हुई — आपराधिक मुकदमे के साथ उनका अगला अध्याय और भी कठोर होने वाला है। लेकिन असली कहानी उनकी नहीं है। असली कहानी यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी सेना के भीतर, सत्ता के उच्चतम शिखर पर, एक ऐसा संकट पल रहा है जिसे शी जिनपिंग खुद अपने हाथों से काबू करने की कोशिश कर रहे हैं — और इसकी कीमत उनके सबसे करीबी साथी चुका रहे हैं।

