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चीन की डंपिंग चाल फिर बेनकाब! भारत ने Glycine और CPVC आयात पर कसा शिकंजा — दक्षिण कोरिया भी घेरे में

चीन की डंपिंग चाल फिर बेनकाब! भारत ने Glycine और CPVC आयात पर कसा शिकंजा — दक्षिण कोरिया भी घेरे में

यह कहानी शुरू होती है उस वक्त से, जब भारतीय घरेलू उद्योग ने महसूस किया कि चीन से आ रहे सस्ते आयात उनकी कमर तोड़ रहे हैं — और यह सिर्फ बाजार की प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित डंपिंग रणनीति थी जो भारतीय विनिर्माताओं को धीरे-धीरे खोखला कर रही थी।

घरेलू विनिर्माता एविड ऑर्गेनिक्स ने वाणिज्य मंत्रालय के समक्ष एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि चीन से ग्लाइसिन — यानी वह रासायनिक यौगिक जो दवा उद्योग और खाद्य स्वाद बढ़ाने में इस्तेमाल होता है — को बाजार मूल्य से कहीं नीचे भारत में पटका जा रहा है, जिससे कंपनी को गंभीर आर्थिक नुकसान हो रहा है। यह शिकायत कोई साधारण व्यावसायिक फरियाद नहीं थी — यह भारत के उभरते फार्मा और केमिकल सेक्टर की सुरक्षा की पुकार थी।

इस शिकायत के बाद वाणिज्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने मंगलवार को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए चीन से ग्लाइसिन आयात के खिलाफ डंपिंग-रोधी जांच शुरू करने की घोषणा की। DGTR अब यह निर्धारित करेगा कि चीन से आयातित ग्लाइसिन को उसकी सामान्य कीमत से कम पर बेचा जा रहा है या नहीं, डंपिंग का मार्जिन कितना है, और इससे भारतीय उद्योग को किस हद तक नुकसान पहुंचा है।

जांच में यदि डंपिंग साबित होती है, तो DGTR वित्त मंत्रालय को डंपिंग-रोधी शुल्क लगाने की सिफारिश कर सकता है — और अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय के हाथ में होगा। यह पूरी प्रक्रिया WTO के नियमों के अनुरूप है, और भारत का यह कदम दर्शाता है कि Atmanirbhar Bharat सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक ठोस नीतिगत इरादा है जिसे सरकार अमल में ला रही है।

लेकिन यह मामला यहीं नहीं रुका। उसी दिन DGTR ने एक और अधिसूचना जारी की, जो इस बार CPVC रेजिन — यानी क्लोरीनेटेड पॉलीविनाइल क्लोराइड — से जुड़ी थी, जिसका उपयोग औद्योगिक पाइपिंग में बड़े पैमाने पर होता है। DCW Limited, Epigral Limited और Lubrizol Advanced Materials India ने मिलकर आरोप लगाया कि चीन और दक्षिण कोरिया से CPVC पर पहले से लागू डंपिंग-रोधी शुल्क को चालाकी से दरकिनार किया जा रहा है — जापान, मलेशिया और थाइलैंड को बीच में लाकर, ताकि शुल्क से बचा जा सके और भारतीय बाजार में सस्ता माल ठूंसा जा सके।

यह circumvention यानी शुल्क-परिहार की रणनीति दरअसल उस पुराने खेल का नया रूप है जो चीन वर्षों से खेलता आया है — जब एक रास्ता बंद हो, तो दूसरे देशों को proxy बनाकर माल भेजो। दक्षिण कोरिया का इस जांच में शामिल होना बताता है कि यह नेटवर्क कितना व्यापक और सुनियोजित है। भारत ने इस बार न केवल मूल स्रोत को, बल्कि पूरी supply chain को निशाने पर लिया है।

आज, जब भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अपने manufacturing sector को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, तब ये जांचें महज व्यापारिक कार्रवाई नहीं हैं — ये भारत की आर्थिक संप्रभुता की रक्षा का एक निर्णायक अध्याय हैं। चीन को यह संदेश साफ मिल रहा है कि भारत अब न डंपिंग सहेगा, न circumvention।

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