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ओमान तट पर भारतीय नाविकों पर हमला: 13 बचाए गए, एक लापता — भारत ने की कड़ी निंदा

ओमान तट पर भारतीय नाविकों पर हमला: 13 बचाए गए, एक लापता — भारत ने की कड़ी निंदा

अरब सागर की लहरों में एक बार फिर भारतीय नाविकों का खून बहा। ओमान के तट के पास पनामा के ध्वज तले चलने वाले तेल टैंकर एमटी एल गैया पर हुए एक बर्बर हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हमले में जहाज पर सवार 14 भारतीय चालक दल के सदस्यों में से 13 को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन एक भारतीय नाविक अभी भी लापता है। समुद्र में तलाश और बचाव अभियान जारी है, और हर पल एक परिवार की सांस रुकी हुई है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने रविवार को इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए साफ कहा कि वाणिज्यिक पोतों, नाविकों, आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ओमान स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर पल-पल नजर रखे हुए है और ओमानी अधिकारियों के साथ मिलकर बचाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। भारत ने लापता नाविक की खोज में सहयोग के लिए ओमान का आभार भी जताया — यह कूटनीतिक सक्रियता दिखाती है कि भारत अपने नागरिकों के लिए किसी भी मोर्चे पर पीछे नहीं हटता।

यह हमला कोई इकलौती घटना नहीं है। पश्चिम एशिया के संघर्ष में अब तक मारे गए 16 भारतीयों में से 10 भारतीय नाविक हैं, और काला सागर में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में पांच और भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं — यह उन परिवारों की त्रासदी है जो अपने कमाने वाले का इंतजार करते-करते थक गए। भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री कार्यबल में से एक है, और हमारे नाविक वैश्विक व्यापार की रीढ़ हैं — उनकी सुरक्षा सिर्फ मानवीय नहीं, राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एक दूरदर्शी प्रस्ताव रखा — ‘नाविक आपात सहायता नेटवर्क’ बनाने का। यह नेटवर्क क्षेत्रीय संघर्षों के बीच समुद्री सुरक्षा जोखिमों से नाविकों को बचाने का एक बहुपक्षीय तंत्र होगा। यह पहल भारत की बढ़ती वैश्विक नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है — जब दुनिया समस्याओं पर बयानबाजी करती है, भारत समाधान की बात करता है।

विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में मुक्त और सुरक्षित नौवहन बहाल करने की अपील दोहराई है, और संवाद व कूटनीति को ही तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता बताया है। लेकिन इस अपील के पीछे एक दृढ़ संदेश भी है — भारत अपने नागरिकों की अनदेखी नहीं करेगा, चाहे वे किसी भी समुद्र में हों। जब तक लापता नाविक की खोज जारी है, पूरा देश उस एक इंसान के साथ खड़ा है — यही भारत की असली ताकत है।

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