टिकैत ने मुजफ्फरनगर से दागे सियासी तीर, BJP पर लगाए गंभीर आरोप
मुजफ्फरनगर: भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गुरुवार को मुजफ्फरनगर स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि अगर चुनाव में बेईमानी नहीं हुई, तो ममता बनर्जी की जीत तय है।
90% मतदान — ममता के पक्ष में जनादेश?
टिकैत ने कहा कि बंगाल में करीब 90% मतदान यह साबित करता है कि जनता अपना फैसला साफ तौर पर दे चुकी है। उनके मुताबिक, इस भारी मतदान प्रतिशत का सीधा फायदा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को मिलेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि बंगाल के प्रवासी मजदूर और नौकरीपेशा लोग भी इस बार वोट डालने के लिए जागरूक हुए, ताकि वोटर लिस्ट से उनका नाम न कटे। टिकैत का मानना है कि यह बढ़ती जागरूकता ममता के पक्ष में काम कर रही है।
‘अब चुनाव की जरूरत ही क्या है?’ — BJP पर सीधा हमला
टिकैत ने भाजपा पर विधायकों और सांसदों को डरा-धमकाकर तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा:
उन्होंने सवाल उठाया — “अब देश में चुनाव की क्या जरूरत रह गई है?” टिकैत का आरोप है कि BJP जोड़-तोड़ और बेईमानी के दम पर सत्ता की राजनीति कर रही है।
यूपी 2027: इकरा हसन के बयान को मिला टिकैत का समर्थन
उत्तर प्रदेश की सांसद इकरा हसन ने हाल ही में कहा था कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में NDA गठबंधन में लोकदल को 50 सीटें मिलनी चाहिए। टिकैत ने इस मांग का खुलकर समर्थन किया।
उन्होंने कहा, “मिलनी चाहिए — लोकदल कोई छोटी पार्टी नहीं है। चुनाव में जब समझौता हो, तो ठीक-ठाक ही हो।” टिकैत का स्पष्ट संदेश है कि लोकदल जैसी ताकतवर पार्टी के साथ सम्मानजनक सीट-बंटवारा होना चाहिए।
सेब वाला कटाक्ष — ‘असली और नकली समर्थन में फर्क होता है’
टिकैत ने एक दिलचस्प अंदाज में राजनीतिक व्यवस्था पर निशाना साधा। उन्होंने सेब की खेती का उदाहरण देते हुए कहा कि पहाड़ के असली सेब और मैदानी इलाकों में उगाई गई उसी वैरायटी की क्वालिटी में जमीन-आसमान का फर्क होता है।
इस उदाहरण के जरिए उनका इशारा साफ था — जनता का असली समर्थन और डर या दबाव से जुटाया गया समर्थन एक जैसा नहीं होता। राजनीति में भी यही फर्क मायने रखता है।
Bottom Line
राकेश टिकैत का यह बयान आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज करेगा। बंगाल में ममता की जीत का दावा हो या यूपी 2027 में लोकदल की सीटों की मांग — टिकैत ने एक बार फिर साबित किया कि वे सिर्फ किसान नेता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के एक मुखर और निर्भीक आवाज हैं।

