अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब एक खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर आ खड़ी हुई है। सऊदी अरब ने पहली बार इस संघर्ष में खुलकर अमेरिका का साथ लेते हुए इराक में संयुक्त एयरस्ट्राइक को अंजाम दिया है, जिसमें 20 ईरान-समर्थित लड़ाके और 6 ईरानी सैन्य सलाहकार मारे गए हैं। कूटनीति के सारे दरवाजे बंद हो चुके हैं। मिसाइलें चल रही हैं, ड्रोन उड़ रहे हैं, और मिडिल ईस्ट का नक्शा तेजी से बदल रहा है — यह अब सिर्फ US बनाम Iran की लड़ाई नहीं रही, बल्कि एक पूरे क्षेत्र की आर-पार की जंग बन चुकी है।
ताज़ा घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस ‘मुवफ्फक साल्टी’ पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन यह हमला एक बड़े खतरे का संकेत था। इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के भीतर हवाई हमले फिर से शुरू कर दिए और साफ कर दिया कि कूटनीति के लिए दिया गया विराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। यह एस्केलेशन यहीं नहीं रुका — मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर खड़े दो नेचुरल गैस जहाजों पर भी ड्रोन हमले हुए, जो इस बात का साफ संकेत है कि युद्ध का भौगोलिक दायरा अब तेज़ी से फैल रहा है।
सऊदी अरब की इस जंग में एंट्री को गेम-चेंजर कहना गलत नहीं होगा। Riyadh अब तक इस संघर्ष से सुरक्षित दूरी बनाए हुए था, लेकिन अपने तेल ठिकानों पर ईरान-समर्थित गुटों के ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने पाला बदल लिया और अमेरिका के साथ खुलकर खड़ा हो गया। इराक में दोनों देशों ने मिलकर ईरान-समर्थित गुटों के हथियार डिपो और रसद केंद्रों को तबाह किया। इस गठजोड़ से इराक, सीरिया और यमन में सक्रिय PMF और हूती जैसे ईरान-समर्थित संगठनों पर दोहरा दबाव बन गया है, और ईरान अब चौतरफा घिरता नज़र आ रहा है।
बातचीत को लेकर दोनों पक्षों के बयान एकदम उलट हैं। डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान बातचीत की मेज पर वापस आने के लिए गिड़गिड़ा रहा है। पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा — “वे पहले ही माफी मांग चुके हैं, लेकिन हमें उन्हें थोड़ा थप्पड़ मारना पड़ेगा। हम उन पर बहुत जोरदार प्रहार करने जा रहे हैं।” दूसरी तरफ, ईरान के उप विदेश मंत्री ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि तेहरान की ओर से बातचीत का कोई अनुरोध नहीं किया गया है। यह जुबानी जंग भी उतनी ही तीखी है जितनी असली मैदान की।
इस संघर्ष ने कुछ गंभीर रणनीतिक कमज़ोरियों को भी उजागर किया है। अमेरिकी थिंक टैंक CSIS और सैन्य सलाहकारों ने राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी है कि लगातार मिसाइलों को हवा में नष्ट करने की वजह से Patriot और THAAD मिसाइल इंटरसेप्टर का स्टॉक खतरनाक रूप से कम हो गया है, जिससे अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह वो कमज़ोरी है जिसे ईरान भुनाने की कोशिश कर सकता है।
इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर पड़ रहा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने और मिस्र के बंदरगाहों के पास जहाजों पर हमलों से दुनिया के करीब एक-चौथाई कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है। इसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ेगा — पेट्रोल, डीजल और ऊर्जा की कीमतें आने वाले हफ्तों में तेजी से बढ़ सकती हैं। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से पूरा करता है, इस उथल-पुथल को बेहद करीब से देख रहा है।
जॉर्डन, इराक, मिस्र, सऊदी अरब और ईरान — ये सभी देश अब इस संघर्ष की लपटों में किसी न किसी रूप में आ चुके हैं। अगर अमेरिका या ईरान की तरफ से कोई बड़ा और निर्णायक हमला होता है, तो पूरा मध्य पूर्व एक लंबे और विनाशकारी युद्ध की चपेट में आ जाएगा। दुनिया सांस रोककर देख रही है।

