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135 साल पुराना ब्रिटिश कानून अब इतिहास — संसद ने ‘Bankers Books Evidence Bill 2026’ को दी हरी झंडी

135 साल पुराना ब्रिटिश कानून अब इतिहास — संसद ने 'Bankers Books Evidence Bill 2026' को दी हरी झंडी

औपनिवेशिक युग का एक और कानून dustbin of history में गया। संसद ने सोमवार को Bankers Books Evidence Bill-2026 को पूरी तरह पास कर दिया — और इसके साथ ही 1891 के ब्रिटिश-काल के बैंकिंग साक्ष्य कानून की विदाई तय हो गई।

क्या हुआ और कैसे हुआ?

राज्यसभा ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पास किया। लोकसभा पहले ही 5 अगस्त को इसे अपनी मंजूरी दे चुकी थी। यानी संसद के दोनों सदनों की मुहर लग गई — अब यह कानून बनने की राह पर है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए साफ कहा कि पिछले कुछ दशकों में देश का financial landscape पूरी तरह बदल चुका है। NBFCs, payment aggregators, fintech companies और दूसरे service providers अब करोड़ों भारतीयों की banking जरूरतें पूरी करते हैं — लेकिन उनके लिए कोई unified evidence framework नहीं था। यह बिल वही खाई भरता है।

बड़ी तस्वीर — Bharat का decolonization agenda

यह सिर्फ एक banking law का update नहीं है। यह उस बड़े mission का हिस्सा है जिसमें भारत अपनी legal और institutional architecture को औपनिवेशिक जंजीरों से मुक्त कर रहा है। IPC की जगह BNS आया, CrPC की जगह BNSS — और अब 135 साल पुराने Bankers Books Evidence Act की जगह एक future-ready कानून।

जो देश UPI से दुनिया को चौंका चुका है, जिसके fintech startups global investors की पहली पसंद बन रहे हैं — उस देश का banking evidence law 1891 में अटका नहीं रह सकता था। यह बदलाव देर से आया, लेकिन आया जरूर — और यही मायने रखता है।

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