गणेश चतुर्थी सिर्फ एक त्यौहार नहीं — यह हमारी सनातन संस्कृति की धड़कन है। 14 सितंबर 2026 को गौरी पुत्र गणेश पूरे भारत में करोड़ों भक्तों के घरों में विराजमान होंगे। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि इस बार 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार, पर्व 14 सितंबर को ही मनाया जाएगा।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसीलिए इस समय की पूजा को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। 14 सितंबर को मध्याह्न गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भक्तगण षोडशोपचार गणपति पूजा करते हैं — यानी पूरे सोलह उपचारों के साथ विधि-विधान से बप्पा की आराधना।
अब बात करते हैं शहर-दर-शहर मुहूर्त की। मुंबई में गणपति स्थापना का मुहूर्त सुबह 11:20 से दोपहर 1:48 बजे तक रहेगा, जबकि पुणे में यह 11:16 से 1:44 बजे तक है। अहमदाबाद के भक्तों के लिए मुहूर्त 11:21 से 1:49 बजे तक रहेगा। दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में यह समय क्रमशः 11:02 से 1:31, 11:02 से 1:30 और 11:03 से 1:31 बजे तक है। चंडीगढ़ में 11:04 से 1:33 बजे, जयपुर में 11:08 से 1:36 बजे, हैदराबाद में 10:58 से 1:25 बजे, चेन्नई में 10:51 से 1:18 बजे, बेंगलूरु में 11:02 से 1:28 बजे और कोलकाता में 10:18 से 12:46 बजे तक गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा।
एक जरूरी बात — इस दिन चंद्र दर्शन वर्जित है। 14 सितंबर को सुबह 9 बजकर 10 मिनट से रात 8 बजकर 37 मिनट तक चंद्रमा को देखना मना है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक — यानी झूठे आरोप — का भय रहता है।
दस दिनों तक चलने वाला यह महापर्व अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के साथ समाप्त होगा। बप्पा के स्वागत की तैयारी शुरू कर दीजिए — गणपति बप्पा मोरया!
(नोट: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और पंचांग पर आधारित हैं।)

