BJP 15, Congress 10, AAP 1 — हाड़ौती के 26 निकायों का फाइनल स्कोर
राजस्थान के हाड़ौती संभाग में नगर निकाय सभापति चुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं, और तस्वीर एकदम साफ है — बीजेपी ने 26 में से 15 निकायों पर कब्जा जमाया, कांग्रेस 10 पर सिमट गई, और सबसे बड़ा चौंकाने वाला नतीजा आया बारां नगर परिषद से, जहां आम आदमी पार्टी ने 60 में से 31 पार्षदों के दम पर बोर्ड बनाकर कांग्रेस के वर्षों पुराने किले को ध्वस्त कर दिया। बारां, बूंदी, झालावाड़ और कोटा — चारों जिलों में हुए इन चुनावों ने स्थानीय राजनीति की नई इबारत लिख दी है।
बारां: AAP का ऐतिहासिक उदय
बारां जिले की 6 निकाय संस्थाओं में कांग्रेस ने 3, बीजेपी ने 2 और आप ने 1 बोर्ड बनाया, लेकिन असली सुर्खी बारां नगर परिषद की रही। AAP की शीतल राठौर ने 31 वोट हासिल कर सभापति पद अपने नाम किया, जबकि कांग्रेस की मीनाक्षी भारद्वाज को महज 20 वोट मिले। बीजेपी के 9 पार्षदों ने मतदान से दूरी बनाए रखी, जो खुद में एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। अंता नगर पालिका में कांग्रेस के प्रदीप नागर ने निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बीजेपी के धनराज चौरसिया को मात दी, वहीं छबड़ा और मांगरोल में बीजेपी ने क्रमशः रीना सुमन और भूपेंद्र सुमन के जरिए जीत दर्ज की। सीसवाली और अटरू कांग्रेस के खाते में गए।
बूंदी: BJP का पंचायती दबदबा
बूंदी जिले की 8 निकायों में बीजेपी ने 5 पर परचम लहराया और कांग्रेस 3 पर रही। बूंदी नगर परिषद में बीजेपी के भरत शर्मा ने कांग्रेस के टीकम जैन को 39 बनाम 21 वोट के बड़े अंतर से हराया। लाखेरी, देई, केशवरायपाटन और इंदरगढ़ में भी बीजेपी प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, जबकि नैनवां, हिंडोली और कापरेन कांग्रेस के पास रहे। बूंदी का यह नतीजा बीजेपी के संगठनात्मक मजबूती की गवाही देता है, जो ग्राउंड लेवल पर अपनी पकड़ बनाए हुए है।
झालावाड़: बराबरी का मुकाबला, कांग्रेस ने दिया कड़ा जवाब
झालावाड़ जिले की 8 निकाय संस्थाओं में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने 4-4 सीटें जीतीं — यानी यहां मुकाबला बिल्कुल बराबरी का रहा। झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस के राजेश गुर्जर ने 30 वोट पाकर बीजेपी के राजकुमार सोनी (15 वोट) को दोगुने अंतर से हराया। झालरापाटन, पिड़ावा, मनोहरथाना और अकलेरा बीजेपी के खाते में गए, जबकि भवानीमंडी, खानपुर, झालावाड़ और दाग में कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। यह नतीजा बताता है कि झालावाड़ में दोनों दलों की जमीनी ताकत लगभग समान है और यहां हर सीट के लिए असली जंग होती है।
कोटा: BJP का वर्चस्व, लेकिन इटावा में अलग खेल
कोटा जिले की पांच नगरपालिकाओं में से चार में सोमवार को अध्यक्ष पद का फैसला हुआ। सांगोद, रामगंजमंडी और सुल्तानपुर में बीजेपी प्रत्याशी सभापति बने, जबकि इटावा में निर्दलीय निर्मला नागर बीजेपी के समर्थन से अध्यक्ष चुनी गईं — यानी प्रभावी रूप से यह सीट भी बीजेपी के पाले में ही गई। पांचवीं नगरपालिका सुकेत में अध्यक्ष का चुनाव 25 सितंबर को होगा। कोटा के नतीजों के दौरान राजनीतिक तनाव भी खुलकर सामने आया — रामगंजमंडी में मंत्री मदन दिलावर के काफिले को रोककर विरोध प्रदर्शन हुआ, सुल्तानपुर में बीजेपी-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी के बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और बीजेपी पार्षदों की गाड़ी का शीशा टूटने की घटना भी दर्ज हुई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में विधायक चेतन पटेल थाने के बाहर धरने पर बैठे।
आगे क्या? 25 सितंबर पर टिकी निगाहें
हाड़ौती के निकाय चुनावों की अंतिम तस्वीर 25 सितंबर को पूरी होगी, जब कोटा नगर निगम के मेयर पद के साथ-साथ सुकेत नगरपालिका के अध्यक्ष का भी चुनाव होगा। अभी तक का हिसाब देखें तो बीजेपी 15, कांग्रेस 10 और AAP 1 निकाय पर काबिज है — और इटावा को भी बीजेपी के प्रभाव क्षेत्र में गिना जाए तो भगवा पार्टी की बढ़त और मजबूत दिखती है। बारां में AAP का उभार इस पूरे चुनाव का सबसे बड़ा political takeaway है, जो संकेत देता है कि हाड़ौती की जनता अब तीसरे विकल्प को भी गंभीरता से आजमाने के लिए तैयार है।

