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आज का पंचांग 18 अक्टूबर 2026: महाष्टमी पर जानें शुभ मुहूर्त, नक्षत्र और मां महागौरी पूजन का सही समय

आज का पंचांग 18 अक्टूबर 2026: महाष्टमी पर जानें शुभ मुहूर्त, नक्षत्र और मां महागौरी पूजन का सही समय

18 अक्टूबर 2026 — शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन, महाष्टमी का वह पावन क्षण जब मां महागौरी की आराधना पूरे भारत में गूंजती है। हिंदू पंचांग की यह प्राचीन परंपरा हमारी सनातन सभ्यता की जीवंत धड़कन है — और अगर आप आज के दिन को सही मुहूर्त में जीना चाहते हैं, तो यह पूरा विवरण आपके लिए है।

आज की तिथि और संवत क्या है?

आज विक्रम संवत् 2083, शक संवत 1948, आश्विन मास, शुक्ल पक्ष, रविवार का दिन है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह 18 अक्टूबर 2026 है। सप्तमी तिथि प्रातः 08 बजकर 26 मिनट तक रहेगी, और उसके तुरंत बाद अष्टमी तिथि का शुभारंभ होगा। सूर्य देव इस समय दक्षिणायन में और शरद ऋतु के प्रभाव में हैं — यानी प्रकृति भी देवी की उपासना के लिए तैयार है।

यह वही समय है जब हमारे ऋषि-मुनियों ने पंचांग की रचना की थी — ताकि हर गृहस्थ, हर साधक जान सके कि ब्रह्मांड की ऊर्जा किस दिशा में बह रही है।

आज का नक्षत्र और योग कौन सा है?

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का आरंभ होगा। योग की दृष्टि से आज सुकर्म योग रात्रि 11 बजकर 56 मिनट तक विद्यमान रहेगा, फिर धृति योग प्रारंभ होगा। करण में वणिज करण प्रातः 08:27 तक और उसके बाद विष्टि (भद्रा) करण सक्रिय होगा।

सुकर्म योग का अर्थ ही है — शुभ कर्म का काल। महाष्टमी के साथ इस योग का संयोग इस दिन को विशेष रूप से फलदायी बनाता है।

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति क्या रहेगी?

सूर्योदय प्रातः 06:23 बजे और सूर्यास्त सायं 05:49 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 01:10 बजे और चंद्रास्त रात्रि 11:27 बजे होगा। सूर्य देव तुला राशि में विराजमान हैं। चंद्र देव रात्रि 07:33 बजे तक धनु राशि में रहेंगे और उसके पश्चात मकर राशि में प्रवेश करेंगे। यह राशि परिवर्तन रात्रिकालीन पूजा और हवन के लिए एक नई ऊर्जा लेकर आता है।

आज का शुभ मुहूर्त कब है?

पूजा, हवन, कन्या पूजन और किसी भी शुभ कार्य के लिए सबसे उत्तम समय है अभिजीत मुहूर्त — दोपहर 11:43 से 12:29 बजे तक। इसके अलावा, अमृत काल प्रातः 07:24 से 09:12 बजे तक रहेगा, जो सुबह की पूजा के लिए अत्यंत शुभ है।

इन मुहूर्तों में की गई देवी आराधना का फल कई गुना बढ़ जाता है — यह हमारे वैदिक शास्त्रों का स्पष्ट मत है।

किन समयों से बचना चाहिए?

राहुकाल शाम 04:30 से 06:00 बजे तक रहेगा — इस अवधि में कोई भी नया शुभ कार्य आरंभ न करें। गुलिक काल दोपहर 03:30 से शाम 05:00 बजे तक और यमगंड दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक रहेगा। इन तीनों कालों में पूजा-पाठ के अतिरिक्त कोई नया उद्यम टालना ही बुद्धिमानी है।

महाष्टमी पर मां महागौरी की पूजा कैसे करें?

आज रविवार और महाष्टमी का दुर्लभ संयोग है। मां महागौरी की विधिवत पूजा करें, कन्या पूजन करें और देवी को नारियल का भोग अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ आज के दिन विशेष फलदायी माना जाता है। मां महागौरी शक्ति, शांति और पवित्रता की प्रतीक हैं — उनकी आराधना से जीवन में स्थिरता और समृद्धि आती है।

यह नवरात्रि केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है — यह भारत की उस सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है जो हजारों वर्षों से अटूट है। जय माता दी।

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