भारत माता की जय। और इस जय को बुलंद रखने के लिए हमारे सुरक्षा बल दिन-रात एक कर रहे हैं।
बात शुरू होती है दक्षिण कश्मीर से, जहाँ हाल के हफ्तों में आतंकी हमलों की एक श्रृंखला ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड में ला दिया। उन हमलों के बाद खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया और जल्द ही नई इनपुट्स सामने आईं — इनपुट्स जो साफ संकेत दे रही थीं कि आतंकी संगठन 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह को निशाना बनाने की फिराक में हैं। इसके साथ ही कश्मीरी पंडितों को ऑनलाइन धमकियाँ मिलने की खबरें भी सामने आईं, जिसने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया।
इन्हीं खुफिया इनपुट्स के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा बलों ने पूरे केंद्र शासित प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया। जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) — सभी एजेंसियाँ एकजुट होकर मैदान में उतर आईं। यह वही बहु-स्तरीय सुरक्षा घेरा है जो भारत के दुश्मनों को हर बार मुँह की खिलाने पर मजबूर करता है।
सबसे पहले जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे यानी NH-44 पर मोबाइल चेकपॉइंट्स की संख्या तेजी से बढ़ाई गई। शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों में नाके लगाए गए और हर गाड़ी, हर शख्स की बारीकी से जाँच शुरू हुई — पहचान पत्र, सामान, गाड़ी के हर कोने की तलाशी। इसके कुछ ही दिनों बाद ड्रोन सर्विलांस को भी तैनात कर दिया गया, जो प्रमुख रास्तों, सार्वजनिक स्थानों और संवेदनशील इलाकों पर रियल-टाइम नजर रख रहे हैं।
तब तक K9 डॉग स्क्वॉड भी एक्शन में आ चुके थे। विस्फोटकों का पता लगाने और इलाके को सुरक्षित करने में ये दस्ते अहम भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही बाजारों, ट्रांसपोर्ट हब और सीमावर्ती इलाकों में CCTV कवरेज को और सघन किया गया — ताकि कोई भी संदिग्ध हरकत कैमरे की नजर से न बच सके। Quick Response Teams (QRTs), बम निरोधक दस्ते और एंटी-सबोटाज यूनिट्स को हर वक्त स्टैंडबाय पर रखा गया है।
रात के अँधेरे में भी सुरक्षा बल सोते नहीं। नाइट पेट्रोलिंग और इलाके में दबदबा बनाए रखने के अभियान पूरे कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र में जारी हैं। नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास घुसपैठ के संभावित रास्तों पर खास नजर रखी जा रही है, क्योंकि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का यही पुराना खेल रहा है — सीमा पार से घुसपैठ कराओ, खून बहाओ, और भारत की तरक्की को रोको। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी यह साजिश नाकाम होगी।
इस पूरी कवायद के तीन साफ मकसद हैं — हाल की घटनाओं से जुड़े बचे हुए आतंकियों को ढूँढ निकालना, चल रही अमरनाथ यात्रा को सकुशल संपन्न कराना और पूरे केंद्र शासित प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के जश्न को सुरक्षित बनाना। अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि जाँच के दौरान पूरा सहयोग करें, सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी सुरक्षा चौकी को दें।
उम्मीद है — और यकीन भी है — कि स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम निर्विघ्न संपन्न होंगे। भारत के सुरक्षा बलों का यह संकल्प, यह एकजुटता, यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जय हिंद।

