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श्रीरंगम मंदिर की पवित्र भूमि पर कब्जा: DMK नेता समेत छह आरोपियों पर FIR दर्ज

श्रीरंगम मंदिर की पवित्र भूमि पर कब्जा: DMK नेता समेत छह आरोपियों पर FIR दर्ज

तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम में, जहाँ सदियों से अरुलमिगु अरंगनाथ स्वामी का दिव्य मंदिर खड़ा है — वैष्णव परंपरा का एक जीवंत केंद्र — वहाँ की पवित्र भूमि को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने का प्रयास किया गया। यह कोई साधारण जमीन विवाद नहीं है। यह हिंदू धरोहर पर सीधा हमला है।

मंदिर प्रबंधन के संयुक्त आयुक्त शिवरामकुमार की शिकायत पर तमिलनाडु पुलिस ने DMK के स्थानीय नेता एम. रामकुमार समेत छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि सर्वे नंबर 762 की 7,515 वर्ग फुट जमीन — जो मंदिर के कुल 5 एकड़ 87 सेंट भूभाग का हिस्सा है — को 2022 में अवैध रूप से रामकुमार के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। उसी जमीन पर, आरोप है, DMK का चुनाव शिविर कार्यालय चल रहा है।

यह पूरा षड्यंत्र कागजों पर बड़ा साफ-सुथरा दिखता है — लेकिन असलियत चौंकाने वाली है।

FIR के अनुसार, 5 दिसंबर 2022 को पद्मा रेंगराजन और विजया कृष्णसामी ने कथित तौर पर 1.45 करोड़ रुपये में यह जमीन रामकुमार को बेची। दो दिन बाद, साउंदरराजन और विजया कृष्णसामी ने हिस्सेदारी का दावा करते हुए 72.5 लाख रुपये का सेल डीड रजिस्टर कराया। फिर 19 जनवरी 2023 को वेंकटवरधन ने भी यही किया — एक और 72.5 लाख का सेल डीड। इसके ऊपर से करेक्शन डीड भी दर्ज हुई। तीनों सेल डीड की कुल घोषित वैल्यू 2.9 करोड़ रुपये बताई गई है। यानी एक के बाद एक, कागजों की परतें बिछाई गईं — जैसे किसी ने जानबूझकर जाल बुना हो।

राज्य के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्त मंत्री एस. रमेश (TVK) ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि DMK के इस स्थानीय पदाधिकारी ने सबको धोखा दिया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पूर्व HR&CE मंत्री और कुछ सरकारी अधिकारियों की संभावित संलिप्तता की भी जांच होनी चाहिए। तत्कालीन श्रीरंगम सब-रजिस्ट्रार का नाम भी FIR में शामिल है — जो इस मामले को महज एक व्यक्ति के लालच की कहानी से कहीं बड़ा बनाता है।

रामकुमार ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच में इस मामले में पहले से एक केस लंबित है। लेकिन यह तर्क उस तथ्य को नहीं बदलता कि 2023 में अदालत में मालिकाना हक के दावे को — मंदिर के स्वामित्व के पर्याप्त सबूतों के चलते — खारिज किया जा चुका था। फिर भी, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन किसी और के नाम रजिस्टर हो गई।

यह मामला सिर्फ एक FIR नहीं है। यह उस बड़े सवाल को फिर से उठाता है जो हर हिंदू के मन में है — जब मंदिरों की जमीन, उनकी संपत्ति, उनका प्रबंधन सरकारी नियंत्रण में हो, तो उनकी रक्षा कौन करेगा? श्रीरंगम का यह मंदिर हजार साल पुरानी विष्णु भक्ति का प्रतीक है। उसकी भूमि पर कब्जे की कोशिश महज एक संपत्ति विवाद नहीं — यह सांस्कृतिक अतिक्रमण है। और अब, जब FIR दर्ज हो चुकी है, देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि न्याय मिलता है या नहीं।

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