भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी: राफेल डील में ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी जीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 13-14 जून को फ्रांस यात्रा से पहले ही भारत को एक बड़ी कूटनीतिक और रक्षा जीत मिली है। फ्रांस ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि वह राफेल लड़ाकू विमानों के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) और भारतीय हथियारों के एकीकरण को लेकर पूरी तरह तैयार है।
फ्रांसीसी सूत्रों ने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ “खरीदार-विक्रेता” का नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी है। भारत के लिए यह सिग्नल बेहद अहम है — दुनिया की एक बड़ी रक्षा शक्ति भारत को बराबरी का दर्जा दे रही है।
114 राफेल के लिए LoR जारी — ₹3.25 लाख करोड़ का मेगा डील
भारत ने फ्रांस को 114 अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद के लिए औपचारिक Letter of Request (LoR) भेज दिया है। यह रक्षा खरीद प्रक्रिया का पहला और सबसे अहम कदम होता है।
ये सभी विमान ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में ही बनाए जाएंगे। फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation किसी भारतीय कंपनी के साथ मिलकर इनका निर्माण करेगी।
भारत की Non-Negotiable शर्तें
भारत ने साफ कर दिया है — यह डील हमारी शर्तों पर होगी। और फ्रांस मान गया है।
F-4 और F-5 वर्जन — नई पीढ़ी के राफेल, नई ताकत
IAF अभी F3R वर्जन के 36 राफेल उड़ाती है, जो 2015 में खरीदे गए थे। लेकिन नए सौदे में भारत को मिलेंगे F-4 और आगामी F-5 वर्जन — जो कहीं ज्यादा घातक हैं।
नए राफेल में क्या होगा खास?
AI-इनेबल्ड राफेल मतलब — भारतीय पायलट को युद्धक्षेत्र में सबसे तेज़ और सबसे स्मार्ट फाइटर जेट मिलेगा।
55-60% स्वदेशीकरण — ‘आत्मनिर्भर भारत’ की असली उड़ान
इस डील में सिर्फ Dassault नहीं, बल्कि इंजन निर्माता Safran और एवियोनिक्स कंपनी Thales भी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का हिस्सा बनेंगी।
एक बार तकनीक भारत में स्थापित हो जाने के बाद स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी 55 से 60 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यह भारत के एयरोस्पेस सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित होगा।
176 राफेल — भारतीय वायुशक्ति का नया युग
अभी IAF के पास 36 राफेल हैं और Indian Navy ने 26 नेवल राफेल का ऑर्डर दिया है। 114 नए विमान जुड़ने के बाद भारत के पास कुल 176 राफेल होंगे।
अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर पहले से MRO सुविधा, ट्रेंड मैनपावर और स्पेयर पार्ट्स मौजूद हैं। दो अतिरिक्त स्क्वाड्रन — यानी 36-38 विमान — तुरंत शामिल करने की क्षमता IAF के पास है।
PM मोदी की फ्रांस यात्रा — कूटनीति और ताकत का संगम
PM मोदी 13-14 जून को फ्रांस के नीस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर जाएंगे। इसके बाद 16-17 जून को वे Évian में G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और 18-19 जून को पेरिस का दौरा करेंगे।
यह यात्रा सिर्फ डिप्लोमेसी नहीं है — यह भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का प्रदर्शन है। जब मोदी नीस पहुंचेंगे, तब तक राफेल डील की नींव पहले ही रखी जा चुकी होगी।

