रविवार को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली के जवाब में भाजपा ने देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च निकाले, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को सड़कों पर उतारा, और शाम होते-होते एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए INDIA गठबंधन की रैली को सीधे-सीधे “अराजक और अनुशासनहीन तमाशा” करार दे दिया।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भाजपा मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राहुल गांधी के उस बयान पर सीधा हमला बोला, जिसमें उन्होंने 2024 के आम चुनाव को अवैध बताया था। पात्रा ने कहा, “यह हिंदुस्तान आपके अब्बूजान का नहीं है — यह हिंदुस्तानियों का है। यहां एक चायवाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है, और यही बात आपको सबसे अधिक चुभती है।” यह बयान सीधे तौर पर वंशवाद की राजनीति पर प्रहार था — उस सोच पर, जो सत्ता को परिवार की विरासत समझती है।
पात्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 130 करोड़ भारतीयों का आशीर्वाद प्राप्त है और जब तक विपक्ष असली मुद्दों की बजाय अराजकता की राजनीति करता रहेगा, मोदी कहीं नहीं जाने वाले। यह महज एक चुनावी बयानबाजी नहीं — यह उस बड़े सियासी सच का इज़हार है जिसे 2024 के जनादेश ने पहले ही साबित कर दिया।
राहुल गांधी ने रामलीला मैदान की रैली को “शिव की बारात” कहा था। पात्रा ने इस पर कहा — यह शिव की बारात नहीं, बल्कि एक बेतरतीब तमाशा था। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष के पास जनता के लिए कोई ठोस विज़न है, या सिर्फ नारे?

