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जब अलगाववादी मीरवाइज ने की पीएम मोदी की तारीफ — कश्मीर बदल रहा है, देख लो!

जब अलगाववादी मीरवाइज ने की पीएम मोदी की तारीफ — कश्मीर बदल रहा है, देख लो!

श्रीनगर से एक ऐसी खबर आई जिसने सबको चौंका दिया। अलगाववादी नेता और जम्मू-कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की — हां, आपने सही पढ़ा — तारीफ की।

यह सब हुआ एक शुक्रवार को, श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान। मीरवाइज ने अपने संबोधन में कहा कि जब पीएम मोदी ने पहली बार सत्ता संभाली थी, तब उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग की बात की थी और पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि उन शुरुआती पहलों ने पूरे दक्षिण एशिया में उम्मीद की एक नई लहर जगाई थी।

मीरवाइज ने आगे कहा कि पीएम मोदी आजाद भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले नेताओं में से एक हैं, और इसीलिए वे उस जुड़ाव की भावना को फिर से जीवित करने और भारत-पाकिस्तान के बीच सार्थक बातचीत की शुरुआत करने की अनूठी स्थिति में हैं। इस बयान की video clips जैसे ही social media पर आईं, बहस छिड़ गई — कई users ने इसे मोदी की सीधी तारीफ के रूप में देखा, और यह viral हो गया।

इसी भाषण में मीरवाइज ने पश्चिम एशिया की हालिया घटनाओं का भी जिक्र किया — अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच के टकराव को उदाहरण बनाते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ सैन्य ताकत से कभी स्थायी शांति नहीं आती। देश चाहे जितना लड़ लें, आखिरकार बातचीत की मेज पर ही लौटना पड़ता है — यह उनका साफ संदेश था।

मीरवाइज के लिए यह कोई नई राह नहीं है। उनके पिता मौलवी फारूक की 1990 में हत्या कर दी गई थी — उस दौर में जब कश्मीर खून और बारूद में डूबा हुआ था। उस त्रासदी के बावजूद मीरवाइज तीन दशकों से भी ज्यादा समय से हिंसा के बजाय संवाद की वकालत करते रहे हैं। उन्होंने हुर्रियत नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के बीच हुई पुरानी मुलाकातों को याद किया और कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उन बैठकों ने अविश्वास की दीवार को कम करने में मदद की थी।

अपने संबोधन के अंत में मीरवाइज ने लोगों से — खासकर युवा पीढ़ी से — अपील की कि वे आस्था, चरित्र, सेवा, सादगी और जिम्मेदारी के मूल्यों से फिर से जुड़ें। उनका मानना है कि इन्हीं बुनियादी मूल्यों पर एक मानवीय और सिद्धांतों पर चलने वाला समाज खड़ा हो सकता है।

यह बयान किसी साधारण घटना की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। एक ऐसे नेता का — जिसे दशकों तक भारतीय राज्यसत्ता का विरोधी माना जाता रहा — पीएम मोदी के नेतृत्व को सार्वजनिक मंच पर स्वीकार करना, यह कश्मीर के बदलते मिजाज की एक बड़ी निशानी है। नया कश्मीर सिर्फ सरकारी दस्तावेजों में नहीं, जामिया मस्जिद के मिंबर से भी दिखने लगा है।

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