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चीन का तिब्बत में 60,000 MW सुपर-डैम: ब्रह्मा चेलानी बोले — ‘भारत होता तो चीन आसमान सिर पर उठा लेता’

चीन का तिब्बत में 60,000 MW सुपर-डैम: ब्रह्मा चेलानी बोले — 'भारत होता तो चीन आसमान सिर पर उठा लेता'

नई दिल्ली: चीन द्वारा तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर 60,000 मेगावाट की क्षमता वाले सुपर-डैम के निर्माण की योजना ने भारत में रणनीतिक बहस को तेज कर दिया है।著名 strategic thinker और जल-भू-राजनीति के विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने इस मुद्दे पर X (पूर्व ट्विटर) पर एक तीखी पोस्ट के जरिए भारत की खामोशी पर सीधा सवाल उठाया है।

चेलानी ने अपनी पोस्ट में एक hypothetical scenario रखा — अगर भारत विवादित सीमा के ठीक ऊपर, चीनी इलाके में ऐसा कोई सुपर-डैम बना रहा होता, तो बीजिंग की प्रतिक्रिया क्या होती? उनके मुताबिक, चीन तुरंत अंतरराष्ट्रीय राय जुटाता, पर्यावरणीय खतरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता, वैज्ञानिक चिंताओं को उजागर करता और इस प्रोजेक्ट को एक गैर-जिम्मेदाराना व सीधे रणनीतिक खतरे के रूप में global stage पर स्थापित कर देता।

भारत के पास सबूत हैं, फिर भी चुप्पी क्यों?

चेलानी ने इस पूरे मामले की सबसे बड़ी विडंबना यह बताई कि भारत के पास पहले से ही ठोस सबूत मौजूद हैं जो इस सुपर-डैम पर अंतरराष्ट्रीय बहस की दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को किसी hidden fault line का अनुमान लगाने या worst-case scenario की कल्पना करने की जरूरत नहीं है।

दरअसल, चीनी वैज्ञानिकों ने खुद सक्रिय ‘पैजेन फॉल्ट‘ (Paizhen Fault), टूटी-फूटी चट्टानों, कमजोर नींव क्षमता, अस्थिर जलाशय ढलानों और क्षेत्र के भूकंपीय इतिहास का अत्यंत विस्तृत तकनीकी दस्तावेजीकरण किया है। यानी खतरे का प्रमाण चीन की अपनी रिसर्च में दर्ज है — और भारत इसे global forum पर नहीं उठा रहा।

यह डैम न केवल भारत के लिए बल्कि downstream देश बांग्लादेश के लिए भी एक existential water security threat है। ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन का यह एकतरफा नियंत्रण भारत की strategic autonomy को सीधे चुनौती देता है — और यही वो असली सवाल है जिसे India को दुनिया के सामने रखना चाहिए।

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