भारत की एनर्जी सिक्योरिटी में ऐतिहासिक छलांग
हैदराबाद: केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने शुक्रवार को ऐलान किया कि भारत सरकार के पास अब 80 दिनों की बिजली उत्पादन जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है। यह उस दौर का अंत है जब देश कोयला संकट से जूझता था और बिजली कटौती आम बात थी।
PM नरेंद्र मोदी के सीधे निर्देश पर यह रणनीतिक भंडारण किया गया है — खासतौर पर मानसून सीज़न को ध्यान में रखते हुए, जब भारी बारिश कोयला उत्पादन को बाधित कर सकती है।
रिकॉर्ड प्रोडक्शन, घोटालों का दौर गया
भारत अब सालाना 1.04 करोड़ टन कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है — यह आंकड़ा देश की एनर्जी इंडिपेंडेंस की दिशा में एक गेम-चेंजर है।
रेड्डी ने पिछली UPA सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस दौर में कोयला क्षेत्र घोटालों के लिए बदनाम था। आज वही सेक्टर देश की ताकत बन चुका है।
अर्जेंटीना में क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक — भारत की ग्लोबल स्ट्रैटेजी
मंत्री ने बताया कि अर्जेंटीना में अधिग्रहित महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक में काम शुरू हो चुका है और जल्द ही उत्पादन भी शुरू होने की उम्मीद है।
यह भारत की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें देश लिथियम, कोबाल्ट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स के लिए ग्लोबल सोर्सिंग नेटवर्क बना रहा है — EV और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के भविष्य को ध्यान में रखते हुए।
क्या हैं मुख्य उपलब्धियां?
आगे की राह
सरकार देशभर में महत्वपूर्ण खनिज भंडारों की पहचान और अन्वेषण में तेजी ला रही है। जहां एक्सप्लोरेशन पूरा हो चुका है, वहां नीलामी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
यह सिर्फ एनर्जी सिक्योरिटी की बात नहीं — यह आत्मनिर्भर भारत की उस विज़न का हिस्सा है जो देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
(इनपुट: समाचार एजेंसी PTI)

