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कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे का ‘लाठीचार्ज’ वाला बयान — Congress का असली युवा-विरोधी चेहरा बेनकाब

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे का 'लाठीचार्ज' वाला बयान — Congress का असली युवा-विरोधी चेहरा बेनकाब

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे बेरोजगार युवाओं को लेकर जो बयान दिया, उसने एक बड़ा सच उजागर कर दिया है — कि सत्ता में आते ही Congress का “युवाओं का हमदर्द” वाला मुखौटा उतर जाता है। यह सिर्फ एक नेता की जुबान की फिसलन नहीं है; यह उस पार्टी की मानसिकता का आईना है जो विपक्ष में रहते हुए NEET और भर्ती घोटालों पर सड़क पर उतरती है, और सत्ता मिलते ही उन्हीं युवाओं को लाठीचार्ज की धमकी देती है।

सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में खरगे साफ कहते सुने गए — “मैं इस्तीफा दूंगा। उन्हें 25 दिन तक भूख हड़ताल करने दें। फिर भी अगर वे नहीं माने तो हम उन पर लाठीचार्ज करेंगे और उसके बाद इस्तीफा दे देंगे।” यह बयान पुलिस भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर उम्मीदवारों के बढ़ते विरोध के संदर्भ में आया था। जिन युवाओं ने सालों की मेहनत और तैयारी के बाद इस परीक्षा में भाग लिया, उन्हें एक मंत्री की तरफ से मिला जवाब था — धमकी, उपेक्षा और अहंकार।

Congress का दोहरा चेहरा, BJP का पलटवार

BJP ने इस बयान को तुरंत राष्ट्रीय मुद्दा बनाया और यह सही भी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने दो टूक कहा कि NEET पर छात्रों का हमदर्द बनने का ढोंग करने वाली Congress का असली चेहरा कर्नाटक में सामने आ गया है। उन्होंने PM नरेंद्र मोदी के छात्रों के प्रति संवेदनशील रवैये से तुलना करते हुए Congress की “अहंकारी” कार्यशैली को रेखांकित किया — और यह तुलना बेमानी नहीं है। एक तरफ केंद्र सरकार युवाओं के लिए रोजगार, स्किलिंग और परीक्षा सुधार की दिशा में काम कर रही है, वहीं कर्नाटक में Congress सरकार उन्हीं युवाओं को डंडे की भाषा में जवाब दे रही है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने भी खरगे पर सीधा हमला बोला। उनका कहना था कि जो लोग सत्ता विरासत में पाते हैं, वे कभी उन युवाओं का दर्द नहीं समझ सकते जो अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर एक सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं। अशोक ने खरगे से राज्य के लाखों भर्ती अभ्यर्थियों से सार्वजनिक माफी और तत्काल इस्तीफे की मांग की। BJP की कर्नाटक इकाई ने भी सोशल मीडिया पर इस बयान की आलोचना का मोर्चा खोल दिया, जो GenZ और युवा मतदाताओं तक सीधा संदेश पहुंचाने की दिशा में एक सटीक रणनीति है।

असली सवाल यह नहीं है कि खरगे माफी मांगते हैं या इस्तीफा देते हैं — असली सवाल यह है कि क्या कर्नाटक के युवा इस बयान को भूल पाएंगे। पुलिस भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप गंभीर है, और जब उस पर जवाब देने की जिम्मेदारी थी तब गृह मंत्री ने जो भाषा चुनी, वह न सिर्फ अस्वीकार्य है बल्कि यह दर्शाती है कि Congress के लिए युवा वोट बैंक हैं, इंसान नहीं। भारत का demographic dividend तभी काम करेगा जब नीति निर्माता युवाओं को ताकत मानें, बोझ नहीं — और इस बयान ने साफ कर दिया कि कर्नाटक की मौजूदा सरकार इस सोच से कोसों दूर है।

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