मेनका गांधी ने सुप्रीम कोर्ट को घेरा, कहा — नवंबर से अब तक कुछ नहीं हुआ
नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के रवैये की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि शीर्ष अदालत ने इस संवेदनशील मामले में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।
“नवंबर से एक भी शेल्टर नहीं बना”
मेनका गांधी ने PTI से बातचीत में कहा, “कोर्ट ने बस इतना कहा कि नवंबर में जो निर्देश दिए थे, वही लागू हों — लेकिन नवंबर से अब तक किसी ने कुछ नहीं किया।” उन्होंने साफ कहा कि देशभर में एक भी नया शेल्टर या अस्पताल नहीं बना, और न ही किसी बस स्टॉप, स्कूल या कॉलेज से कुत्तों को हटाया गया।
उनका कहना है कि कोर्ट के पुराने निर्देश भी पूरे देश में लागू नहीं हो पाए हैं। यह स्थिति “तकनीकी रूप से संभव नहीं है” — यह मेनका का सीधा आरोप है।
पशु अधिकार कार्यकर्ता गौरी मौलेखी का क्या कहना है?
पशु अधिकार कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने कहा कि पहले अदालत ने अलग-अलग जगहों से आवारा कुत्ते हटाने के निर्देश दिए थे। अब यह फैसला राज्यों पर छोड़ दिया गया है, जिससे स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।
विजय गोयल ने किया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वागत
पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उनका संगठन ‘लोक अभियान’ लंबे समय से आवारा कुत्तों के हमलों और आम जनता को होने वाली परेशानियों के मुद्दे को उठाता रहा है।
असली सवाल — जमीन पर होगा क्या?
मेनका गांधी की नाराजगी एक बड़े सच की तरफ इशारा करती है — कागज पर निर्देश और जमीनी हकीकत के बीच की खाई अभी भी पाटी नहीं गई है। जब तक राज्य सरकारें ठोस कदम नहीं उठातीं, आम नागरिकों की सुरक्षा अधर में लटकी रहेगी।

