FAO की चेतावनी: अल नीनो से भारत की कृषि और खाद्य सुरक्षा खतरे में
प्रशांत महासागर में एक बार फिर अल नीनो का नया दौर शुरू हो गया है — और इस बार संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने सीधे भारत को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। FAO के मुताबिक, इस मौसमी घटना के चलते भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे करोड़ों किसानों की रोजी-रोटी सीधे खतरे में आ सकती है।
धान और मक्का पर सबसे बड़ा खतरा
FAO की रिपोर्ट साफ कहती है कि भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। इसका सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों — यानी धान और मक्का — पर पड़ेगा, जो पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं।
रिपोर्ट में 2015-16 के अल नीनो का हवाला दिया गया है, जब भारत में मक्का उत्पादन 4% और धान उत्पादन 1% तक गिर गया था। इस बार स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
41 साल के डेटा पर आधारित है FAO का विश्लेषण
FAO का यह विश्लेषण पिछले 41 वर्षों की सैटेलाइट इमेजरी और जलवायु आंकड़ों पर आधारित है — यानी यह महज एक अनुमान नहीं, बल्कि ठोस वैज्ञानिक आधार पर दी गई चेतावनी है।
रिपोर्ट में जिन देशों में सूखे का खतरा बताया गया है, उनमें शामिल हैं:
किसान सबसे पहले झेलेंगे मार
FAO के प्राकृतिक संसाधन अधिकारी जार्ज अल्वार-बेल्ट्रान ने कहा कि कम बारिश का पहला और सबसे सीधा असर किसानों पर पड़ता है। फसल बर्बाद होने के बाद पशुधन और पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी संकट में आ जाती है।
उन्होंने आगाह किया कि मौजूदा अल नीनो पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है — क्योंकि वैश्विक तापमान पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है और कई देश पहले से ही खाद्य असुरक्षा और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
वैश्विक खाद्य बाजार पर भी असर पड़ेगा
FAO की रिपोर्ट यह भी कहती है कि अल नीनो का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक खाद्य बाजारों में कीमतें बढ़ सकती हैं और उत्पादन में गिरावट से कई देशों को आयात पर और अधिक निर्भर होना पड़ सकता है।
भारत के लिए यह एक बड़ा wake-up call है — अन्नदाता किसान और देश की खाद्य सुरक्षा, दोनों की सुरक्षा के लिए अभी से तैयारी जरूरी है।

