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भारत-नेपाल ट्रेड को मिला नया बूस्ट: पारगमन संधि के तहत पहली कार्गो ट्रेन विराटनगर पहुंची

भारत-नेपाल ट्रेड को मिला नया बूस्ट: पारगमन संधि के तहत पहली कार्गो ट्रेन विराटनगर पहुंची

भारत-नेपाल पारगमन संधि के तहत पहली आधिकारिक कार्गो ट्रेन सोमवार को विराटनगर कस्टम यार्ड पहुंची — यह उस ऐतिहासिक रेल लिंक पर पहली सफल कमर्शियल रन है जिसे तीन साल पहले PM नरेंद्र मोदी और नेपाल के तत्कालीन PM पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’ ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाई थी। कोलकाता बंदरगाह से रवाना होकर बथनाहा-विराटनगर अंतर्राष्ट्रीय रेल मार्ग से गुजरते हुए यह ट्रेन नेपाल के स्वास्तिक ऑयल इंडस्ट्रीज के लिए तीसरे देशों से आयातित 40 कंटेनर कच्चा माल लेकर आई। इस उपलब्धि ने भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

तीन साल बाद मिली असली उड़ान

बथनाहा से विराटनगर बुधनगर, नेपाल के बीच 8 किलोमीटर लंबी क्रॉस-बॉर्डर कार्गो रेल लाइन का उद्घाटन 1 जून 2023 को हुआ था। नई दिल्ली से PM मोदी और PM प्रचंड ने वर्चुअली इस लाइन को लॉन्च किया था, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते तीन साल तक इस रूट पर कोई आधिकारिक कमर्शियल रन नहीं हो सका था। अब जाकर यह सपना हकीकत बना है — और यह सिर्फ एक ट्रेन की आवाजाही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक एकीकरण की एक बड़ी छलांग है।

शुक्रवार की रात कोलकाता से रवाना हुई यह कार्गो ट्रेन सोमवार को सफलतापूर्वक विराटनगर कस्टम यार्ड पहुंची, जहां बड़ी संख्या में भारतीय और नेपाली अधिकारी मौजूद थे। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के समन्वय से यह सेवा संचालित की गई, जो इस पहल की राजनयिक अहमियत को और बढ़ाती है।

Electronic Cargo Tracking से हाईटेक निगरानी

इस कार्गो रेल सेवा को इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम (ECTS) से जोड़ा गया है, जो रियल-टाइम में ट्रेन की लोकेशन और कंटेनर की सुरक्षा की निगरानी करता है। यह सिस्टम सुनिश्चित करता है कि माल निर्धारित रूट पर सुरक्षित रहे और किसी भी बिंदु पर उसकी सटीक जानकारी उपलब्ध हो। Tech-driven logistics का यह मॉडल भारत की उस सोच को दर्शाता है जो पड़ोसी देशों के साथ व्यापार को स्मार्ट, तेज़ और पारदर्शी बनाना चाहती है।

24 घंटे में कोलकाता से नेपाल — Game Changer है यह रूट

नेपाल वाणिज्य दूतावास के महावाणिज्यदूत झक्क प्रसाद आचार्य ने बताया कि इस सेवा के चालू होने से कोलकाता से 24 घंटे के भीतर सभी प्रकार का कच्चा माल नेपाल के कस्टम यार्ड तक पहुंच जाएगा। इससे पहले सड़क मार्ग से यही काम कई दिन लेता था और लागत भी कहीं अधिक थी। अब भारतीय रेल नेटवर्क की ताकत का फायदा नेपाल के उद्योगपतियों को सीधे मिलेगा — कम लागत, कम समय, और ज्यादा भरोसेमंद सप्लाई चेन।

इस कनेक्टिविटी से पूर्वी नेपाल के औद्योगीकरण को विशेष रूप से बल मिलेगा। विराटनगर नेपाल का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, और अब कोलकाता पोर्ट से सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलने से यहां के आयातकर्ताओं और उद्योगपतियों की ट्रांसपोर्ट लागत में भारी कमी आएगी।

भारत की Neighbourhood First Policy को मिली नई धार

यह उपलब्धि PM मोदी की ‘Neighbourhood First’ नीति का एक ठोस और दिखने वाला नतीजा है। भारत ने पिछले एक दशक में नेपाल के साथ सड़क, रेल और ऊर्जा क्षेत्र में जो निवेश किया है, वह अब operational reality बन रहा है। कोलकाता-विराटनगर कार्गो रेल कॉरिडोर न केवल द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत अपने पड़ोसियों के लिए सबसे विश्वसनीय और सक्षम साझेदार है।

भारत-नेपाल कार्गो रेल सेवा का यह सफल परिचालन दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग की एक बड़ी मिसाल है। यह दिखाता है कि जब भारत अपने पड़ोसियों के साथ कनेक्टिविटी बनाने की ठान लेता है, तो नतीजे सिर्फ कागजों पर नहीं, ज़मीन पर भी दिखते हैं।

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