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नवरात्रि में SP सांसद रामजी लाल सुमन का नॉनवेज विवाद: BJP बोली — यह सनातन विरोधी सोच है, वोट बैंक की राजनीति बंद करो

नवरात्रि में SP सांसद रामजी लाल सुमन का नॉनवेज विवाद: BJP बोली — यह सनातन विरोधी सोच है, वोट बैंक की राजनीति बंद करो

पीलीभीत से उठी चिंगारी, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

13 अक्टूबर की वह शाम पीलीभीत में एक आम दावत की तरह शुरू हुई — लेकिन जो वीडियो उस रात कैमरे में कैद हुआ, उसने पूरे उत्तर प्रदेश की सियासत को हिलाकर रख दिया। शारदीय नवरात्रि के पवित्र दिनों में, जब देशभर में माँ दुर्गा की आराधना हो रही थी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन एक कथित नॉनवेज पार्टी में शामिल दिखे — और वह वीडियो अब X, Instagram और WhatsApp पर तेज़ी से वायरल हो चुका है।

यह विवाद सिर्फ एक दावत का नहीं है। यह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले की उस बड़ी लड़ाई का हिस्सा है, जो हिंदू आस्था, सांस्कृतिक पहचान और वोट बैंक की राजनीति के इर्द-गिर्द घूम रही है। और इस बार, मैदान में BJP ने पूरी ताकत से मोर्चा खोल दिया है।

क्या हुआ पीलीभीत में?

रामजी लाल सुमन PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मेलन में शामिल होने पीलीभीत पहुंचे थे। सम्मेलन के बाद वे सपा नेता मुहम्मद आरिफ के घर आयोजित दावत में गए। दावा है कि इस दावत में नवरात्रि के दौरान नॉनवेज परोसा गया, और उसी का वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया। नवरात्रि इस साल 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक मनाई जा रही है — यानी यह घटना उस पवित्र अवधि के ठीक बीच में हुई।

वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन सियासी प्रतिक्रिया तत्काल और तीखी रही। BJP ने इसे सनातन विरोधी सोच का प्रमाण बताते हुए अखिलेश यादव की तथाकथित ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राजनीति पर सीधा हमला बोला।

BJP का पलटवार — “यह वोट बैंक की राजनीति है”

गोंडा से भाजपा विधायक विनय द्विवेदी ने सबसे पहले और सबसे तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि रामजी लाल सुमन हिंदू होने का दिखावा करते हैं, लेकिन उनके दिल और दिमाग में कुछ और ही चलता है। द्विवेदी ने साफ शब्दों में कहा — “यह सब वोट बैंक के लिए किया जा रहा है।” यह आरोप सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि SP की पूरी राजनीतिक संस्कृति पर है।

उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने भी इस मुद्दे पर SP को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नवरात्र जैसा पवित्र पर्व चल रहा हो, तब इस तरह के आयोजन क्यों किए जाते हैं। BJP का संदेश एकदम स्पष्ट है — हिंदू भावनाओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे चुनाव कितने भी नज़दीक हों।

SP का जवाब — “दोहरे मापदंड बंद करो”

समाजवादी पार्टी ने भी चुप रहना मुनासिब नहीं समझा। SP ने BJP पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और इस पूरे विवाद को असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की साज़िश बताया। पार्टी का तर्क है कि BJP लोगों के खान-पान पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही है, जो लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। लेकिन यह तर्क उस जनता को कितना स्वीकार्य होगा जो नवरात्रि में नौ दिन व्रत रखती है — यह असली सवाल है।

इस विवाद ने रामजी लाल सुमन के पुराने बयानों को भी एक बार फिर चर्चा में ला दिया है, जिनमें उन्होंने BJP सरकार के खिलाफ तीखी टिप्पणियां की थीं। अब उनके आलोचक कह रहे हैं कि यह घटना उनकी उस छवि को और उजागर करती है।

2027 से पहले हिंदू आस्था बनी सबसे बड़ा मुद्दा

UP की राजनीति में यह कोई नई बात नहीं कि धर्म और संस्कृति चुनावी रणनीति का केंद्र बन जाते हैं। लेकिन जो बात इस विवाद को अलग बनाती है, वह यह है कि यह नवरात्रि जैसे सबसे पवित्र हिंदू पर्व के दौरान हुआ — जब करोड़ों हिंदू उपवास रखते हैं, माँ दुर्गा की उपासना करते हैं और सात्विक जीवन जीते हैं। ऐसे में एक वरिष्ठ सपा नेता का इस तरह के आयोजन में शामिल होना, चाहे आरोप सही हो या नहीं, BJP को एक तगड़ा राजनीतिक हथियार दे गया है।

2027 के चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन यह वीडियो और इस पर उठा बवाल यह साफ कर देता है कि सनातन धर्म, हिंदू पहचान और सांस्कृतिक मूल्य आने वाले चुनाव में सबसे बड़े मुद्दे होंगे। जो पार्टी इन्हें समझेगी, वही उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होगी। और जो इन्हें हल्के में लेगी — जनता उसका हिसाब ज़रूर करेगी।

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