अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी होगी। मंदिर प्रशासन ने काउंटिंग कर्मचारियों के लिए एक सख्त नया ड्रेस कोड लागू किया है — केसरिया रंग का बिना जेब वाला जंपसूट। यह कोई फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि एक ठोस सुरक्षा उपाय है जो सुनिश्चित करता है कि गिनती के दौरान कोई भी कर्मचारी कुछ भी छुपा न सके।
तय पोशाक के बिना काउंटिंग कक्ष में प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। प्रवेश द्वार पर तीन स्तरीय जांच की व्यवस्था की गई है और मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है। यह व्यवस्था उस मंदिर की है जहाँ हर दिन लाखों श्रद्धालुओं का चढ़ावा आता है — इसलिए हर कदम पर जवाबदेही ज़रूरी है।
36 कर्मचारी, हाईटेक निगरानी और CEO की सीधी नज़र
सूत्रों के अनुसार, काउंटिंग से जुड़े सभी कर्मचारियों का बायोडाटा लिया जा रहा है और उनका पुलिस सत्यापन भी करवाया जा रहा है। राम मंदिर के CEO जितेंद्र मिश्र खुद इन व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल चढ़ावे की गिनती दो शिफ्टों में होती है, जिसमें बैंक के 10 कर्मचारी, मंदिर ट्रस्ट के 4 प्रतिनिधि और 22 आउटसोर्सिंग कर्मचारी — कुल 36 लोग तैनात हैं। इन सभी पर हाईटेक CCTV कैमरों की पैनी नज़र रहती है।
यह सिस्टम बताता है कि राम मंदिर ट्रस्ट सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि एक आधुनिक और जवाबदेह संस्था के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है। भारत के सबसे बड़े तीर्थस्थलों में से एक को इस स्तर की पारदर्शिता के साथ संचालित करना — यही असली राष्ट्र-निर्माण है।
पुजारियों के लिए भी ड्रेस कोड, श्रद्धालुओं को मिलेगा अतिथि सत्कार का अनुभव
धार्मिक समिति के सदस्य महंत राजकुमार दास के अनुसार, गर्भगृह के पुजारियों के लिए भी ड्रेस कोड लागू किया गया है। वे अब पीले रंग का रेशमी या सूती अचला और उत्तरीय धारण करेंगे। पुजारियों के लिए भी मोबाइल फोन पर रोक है और गर्भगृह से बाहर जाने से पहले प्रभारी आचार्य को सूचित करना अनिवार्य होगा।
दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद देने के साथ-साथ तिलक लगाकर सम्मानित करने की व्यवस्था भी की जा रही है। उद्देश्य सीधा है — हर श्रद्धालु को यह अनुभव हो कि वे सिर्फ एक मंदिर में नहीं, बल्कि अपने घर आए हैं। यह भारतीय आतिथ्य परंपरा — अतिथि देवो भव — का सबसे सुंदर आधुनिक रूप है।
इसी बीच, रामनगरी में इस बार करीब 300 स्थानों पर दुर्गा पूजा का आयोजन होगा। 10 अक्टूबर से शुरू होने वाले इन आयोजनों के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। मेयर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने बताया कि पंडाल, प्रतिमाएँ, सजावट और लाइटिंग — सब कुछ भव्य पैमाने पर होगा। अयोध्या एक बार फिर साबित करेगी कि यह सिर्फ एक शहर नहीं, भारत की सांस्कृतिक आत्मा है।

