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बांग्लादेश का बड़ा दांव: तीस्ता और पद्मा पर बनेंगे बैराज, चीन की एंट्री से भारत की बढ़ेगी टेंशन

बांग्लादेश का बड़ा दांव: तीस्ता और पद्मा पर बनेंगे बैराज, चीन की एंट्री से भारत की बढ़ेगी टेंशन

बांग्लादेश का बड़ा दांव: तीस्ता और पद्मा पर बनेंगे बैराज, चीन की एंट्री से भारत की बढ़ेगी टेंशन

ढाका: बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बड़ा ऐलान किया है — उनकी सरकार पद्मा और तीस्ता नदियों पर बैराज बनाएगी। यह घोषणा ऐसे वक्त आई है जब बांग्लादेश पहले ही तीस्ता मेगा प्रोजेक्ट के लिए चीन से मदद मांग चुका है — और भारत के लिए यह सीधा strategic alarm है।

गाजीपुर में की घोषणा

तारिक रहमान ने गाजीपुर में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान की आधारशिला रखने के दौरान यह बात कही। उन्होंने साफ शब्दों में कहा — “इंशा अल्लाह, BNP सरकार पद्मा बैराज और तीस्ता बैराज दोनों पर काम शुरू करेगी।”

तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि BNP ने तीस्ता मुद्दे पर व्यावहारिक कदम उठाए हैं, जबकि बाकी सिर्फ बड़े-बड़े वादे करते रहे।

भारत पर सीधा निशाना

तारिक रहमान ने भारत को सीधे जिम्मेदार ठहराया — उनका कहना है कि सूखे के मौसम में पद्मा नदी में पानी का बहाव इसलिए कम होता है क्योंकि भारत सीमा के पास बने बैराजों से नदी का पानी ऊपर से ही निकाल लेता है।

उन्होंने फरक्का बैराज का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी वजह से समुद्र का खारा पानी बांग्लादेश के दक्षिणी इलाकों में घुस रहा है, जिससे सुंदरबन और आसपास के क्षेत्रों का पर्यावरण खतरे में है।

दशकों पुराना जल विवाद

तीस्ता और पद्मा (भारत में गंगा) के जल बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है। यह मामला कभी सुलझा नहीं — और अब बांग्लादेश ने इसे एक नया मोड़ दे दिया है।

Dragon की Entry — भारत के लिए Red Alert

यही वह बिंदु है जो भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता है। चीन ने तीस्ता मेगा प्रोजेक्ट में दिलचस्पी दिखाई है और बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने हाल की चीन यात्रा में इस परियोजना के लिए औपचारिक अनुरोध किया — जिस पर बीजिंग ने सकारात्मक रुख अपनाया।

भारत शुरू से ही अपनी उत्तर-पूर्वी सीमा के करीब चीनी उपस्थिति को लेकर सतर्क रहा है। तीस्ता नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है — यानी यह सिर्फ पानी का मुद्दा नहीं, strategic geography का मामला है।

भारत को क्या करना चाहिए?

साफ है — बांग्लादेश में बदलती सरकारें और चीन की बढ़ती पैठ भारत के लिए एक double challenge बन रही है। नई दिल्ली को तीस्ता जल समझौते पर ठोस कदम उठाने होंगे, वरना यह रिक्तता चीन भरता रहेगा।

पड़ोस की कूटनीति में देरी की कीमत बहुत बड़ी होती है — और यह बांग्लादेश वाला मामला इसकी जीती-जागती मिसाल बनता जा रहा है।

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