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‘फ्लैट फॉर जॉब’: बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस ED की गिरफ्त में — लालू के ‘लैंड फॉर जॉब’ जैसा नया घोटाला?

'फ्लैट फॉर जॉब': बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस ED की गिरफ्त में — लालू के 'लैंड फॉर जॉब' जैसा नया घोटाला?

बंगाल में बड़ा खुलासा: नौकरी के बदले फ्लैट, ED ने TMC नेता सुजीत बोस को किया गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार रात तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस को नगर निगम भर्ती घोटाले में गिरफ्तार कर लिया। आरोप हैं — पैसे लेकर नौकरी दिलाना, फ्लैट के बदले भर्ती और पूरे सिस्टम को मैनेज करना।

यह मामला लालू यादव के कुख्यात ‘लैंड फॉर जॉब’ स्कैम की याद दिलाता है — फर्क सिर्फ इतना है कि वहां जमीन ली गई, यहां फ्लैट और कैश।

सुजीत बोस: एग रोल वेंडर से मंत्री तक

सुजीत बोस उत्तर 24 परगना और बिधाननगर इलाके के बेहद प्रभावशाली TMC नेता माने जाते थे। कभी छोटे कारोबारी रहे बोस ने CPI(M) से राजनीति शुरू की, फिर TMC में आए और ममता बनर्जी सरकार में अग्निशमन मंत्री बने।

वह सिर्फ चुनावी चेहरा नहीं थे — पार्टी के संगठनात्मक नेटवर्क पर उनकी मजबूत पकड़ थी। यही वजह है कि उनकी गिरफ्तारी को राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है।

घोटाले की शुरुआत कहाँ से हुई?

यह कहानी सीधे सुजीत बोस से नहीं, बल्कि शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच से शुरू होती है। 2023 में ED प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले की तहकीकात कर रही थी। इसी दौरान एजेंसी ने कारोबारी अयान सिल के ठिकानों पर छापा मारा।

यहां से मिले डिजिटल फाइलें, भर्ती दस्तावेज, कथित भुगतान रिकॉर्ड और OMR डेटा ने जांच को नई दिशा दी। ED को शक हुआ कि घोटाला सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं — पश्चिम बंगाल के कई नगर निगमों में भी नौकरियां बेची जा रही थीं।

अयान सिल: घोटाले का ‘टेक्निकल मास्टरमाइंड’

पूरे केस का ऑपरेशनल केंद्र माना जा रहा है अयान सिल को। उसकी कंपनी ABS Infozon Pvt Ltd को कई नगर निगमों की भर्ती प्रक्रिया का ठेका मिला था।

कंपनी पेपर छापती थी, OMR शीट डिजाइन करती थी, उन्हें जांचती थी और मेरिट लिस्ट तैयार करती थी। यानी पूरे भर्ती सिस्टम की चाबी उसी के हाथ में थी। ED का आरोप है कि अयान सिल ने OMR शीट में हेरफेर कर, नंबर बदलकर, पैसे लेकर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाई।

किन पदों पर हुई कथित धांधली?

यह घोटाला किसी बड़े अफसर की नियुक्ति का नहीं था। ED का दावा है कि नगर निगमों की लोअर और मिड-लेवल भर्ती पूरी तरह प्रभावित थी — वे नौकरियां, जिनके लिए गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार सालों पसीना बहाते हैं:

‘फ्लैट फॉर जॉब’: लालू कनेक्शन क्यों?

ED सिर्फ कैश ट्रेल नहीं खंगाल रही। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि नौकरी के बदले फ्लैट लिए गए, संपत्तियां ट्रांसफर हुईं और प्रॉपर्टी डील के जरिए रिश्वत दी गई।

यही वजह है कि इस मामले की तुलना लालू यादव के ‘लैंड फॉर जॉब’ केस से हो रही है। लालू पर आरोप था — रेल मंत्री रहते नौकरी के बदले जमीन ली। यहां आरोप है — नौकरी के बदले फ्लैट और कैश।

सुजीत बोस का नाम कैसे आया?

10 अक्टूबर 2025 को ED ने सुजीत बोस के घर, कार्यालय समेत 13 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान कथित आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल सबूत और 45 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।

ED का दावा है कि नेता, नगरपालिका अधिकारी, निजी कंपनी और बिचौलियों का एक संगठित नेटवर्क मिलकर काम कर रहा था। सुजीत बोस पर आरोप है कि इस नेटवर्क को राजनीतिक संरक्षण उन्हीं की तरफ से मिल रहा था।

कलकत्ता हाईकोर्ट से CBI, फिर ED तक

मामला तब और बड़ा हुआ जब कलकत्ता हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। इसके बाद CBI जांच शुरू हुई और उसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया।

अब इस मामले में भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग — तीनों एंगल शामिल हो गए हैं।

बंगाल में भर्ती घोटालों की फेहरिस्त लंबी है

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में एक के बाद एक भर्ती घोटाले सामने आए हैं — शिक्षक भर्ती घोटाला, SSC मामला, प्राथमिक शिक्षक विवाद, ग्रुप-D नियुक्तियां और अब नगर निगम भर्ती मामला।

BJP का आरोप है कि यह अलग-अलग घोटाले नहीं, बल्कि पूरे भर्ती सिस्टम पर TMC का राजनीतिक कब्जा था — जहां नौकरी योग्यता से नहीं, ‘कटमनी’ और कनेक्शन से मिलती थी।

अब सब कुछ निर्भर करेगा ED के वित्तीय सबूतों पर — प्रॉपर्टी रिकॉर्ड, बैंक ट्रेल, डिजिटल डेटा और दस्तावेज। अगर एजेंसी आरोप साबित कर पाई, तो यह मामला और बड़ा हो सकता है।

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