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धनुष और सारंग: भारत की स्वदेशी तोपों को मिला ₹1000 करोड़ का ऑर्डर, दुनिया में बज रहा ‘मेक इन इंडिया’ का डंका

धनुष और सारंग: भारत की स्वदेशी तोपों को मिला ₹1000 करोड़ का ऑर्डर, दुनिया में बज रहा 'मेक इन इंडिया' का डंका

भारत की रक्षा शक्ति अब सिर्फ सरहदों तक सीमित नहीं रही — वो global arms market में अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज करा रही है।

₹1000 करोड़ का ऑर्डर: धनुष और सारंग की नई उड़ान

कानपुर की ऐतिहासिक आयुध निर्माणियों से निकले दो स्वदेशी तोप सिस्टम — धनुष और सारंग — ने हाल ही में ₹1000 करोड़ का ऑर्डर हासिल किया है, जो इस बात का सबूत है कि भारतीय रक्षा उद्योग अब सिर्फ आत्मनिर्भरता की बात नहीं करता, बल्कि उसे जी कर दिखाता है। रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली कानपुर स्थित कंपनी Advanced Weapons and Equipment India Limited (AWEIL) को अब तक ₹10,000 करोड़ से अधिक के ऑर्डर मिल चुके हैं, और ₹20,000 करोड़ के अतिरिक्त टेंडर में भी कंपनी मजबूत दावेदार बनकर उभरी है।

यह सिर्फ एक कंपनी की कामयाबी नहीं है — यह उस पूरे ecosystem की जीत है जिसे ‘मेक इन इंडिया’ ने खड़ा किया है। जब दुनिया के कोने-कोने में सैन्य संघर्ष भड़क रहे हैं — अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, सऊदी-हूती संघर्ष और इजरायल बनाम हमास-हिजबुल्लाह — तब छोटे-बड़े देश अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए भरोसेमंद हथियार आपूर्तिकर्ता खोज रहे हैं। और भारत उस भरोसे की नई परिभाषा बन रहा है।

कानपुर: भारत के रक्षा उत्पादन का धड़कता दिल

कानपुर की आयुध निर्माणी फैक्ट्रियां भारत के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण रक्षा उत्पादन केंद्रों में से एक हैं, जो दशकों से देश की सेना को हथियार और गोला-बारूद मुहैया कराती आई हैं। आज वही फैक्ट्रियां स्वदेशी छोटे और मध्यम हथियारों के साथ-साथ तोप के गोले और टैंक जैसे भारी हथियार प्रणालियों की global demand को पूरा कर रही हैं। AWEIL के छठे स्थापना दिवस पर आयोजित हथियार प्रदर्शनी में स्कूली छात्रों से लेकर स्थानीय नागरिकों तक, हर किसी ने इन हथियारों को देखकर गर्व महसूस किया — और यह गर्व बेवजह नहीं है।

धनुष, जिसे भारत का अपना Bofors कहा जाता है, एक 155mm/45 caliber की howitzer तोप है जिसे पूरी तरह भारत में डिज़ाइन और निर्मित किया गया है। सारंग भी उसी श्रेणी की एक उन्नत तोप प्रणाली है। दोनों ने अपनी रेंज, सटीकता और reliability से international buyers का ध्यान खींचा है।

DRDO की तकनीकी क्रांति: अगली पीढ़ी की रक्षा प्रणालियाँ

रक्षा मंत्रालय की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट एक और बड़ी खबर लेकर आई है — DRDO ने high-frequency रक्षा प्रणालियों के लिए स्वदेशी advanced technology का सफलतापूर्वक प्रदर्शन और क्रियान्वयन कर दिखाया है। यह तकनीक अगली पीढ़ी के radar systems, electronic warfare platforms, cutting-edge communication networks, intelligence surveillance, reconnaissance और unmanned systems की रीढ़ बनेगी — यानी भविष्य के युद्धक्षेत्र पर भारत की पकड़ और भी मजबूत होगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में 16 Defence Public Sector Undertakings (DPSUs) के वार्षिक प्रदर्शन की समीक्षा की, जिसमें स्वदेशी तकनीक को आगे बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और निर्यात को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। यह सिर्फ bureaucratic review नहीं था — यह एक strategic signal था कि भारत अपने defence export को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता मान चुका है।

भारत का Defence Export Boom: एक नई सभ्यतागत शक्ति का उदय

भारत का defence export पिछले कुछ वर्षों में unprecedented गति से बढ़ा है। जो देश कभी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक था, वह आज एक credible exporter बन चुका है। यह transformation रातोरात नहीं हुई — यह दशकों की scientific investment, DRDO की अथक मेहनत, और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी नीतियों का सामूहिक परिणाम है।

धनुष और सारंग का ₹1000 करोड़ का ऑर्डर उस बड़ी तस्वीर का एक हिस्सा है जिसमें भारत न सिर्फ अपनी सेना को सशक्त बना रहा है, बल्कि दुनिया को यह भी बता रहा है कि भारतीय इंजीनियरिंग, भारतीय precision और भारतीय ambition — ये तीनों मिलकर एक ऐसी ताकत बनाते हैं जिसे नज़रअंदाज़ करना अब किसी के लिए संभव नहीं। Bharat ab sirf follow नहीं करता — Bharat lead करता है।

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