छोड़कर सामग्री पर जाएँ
Home » Blog » ट्रंप का 100% टैरिफ बम — पीएम मोदी की ‘सीक्रेट’ स्ट्रैटेजी ने पहले ही दे दिया जवाब

ट्रंप का 100% टैरिफ बम — पीएम मोदी की ‘सीक्रेट’ स्ट्रैटेजी ने पहले ही दे दिया जवाब

ट्रंप का 100% टैरिफ बम — पीएम मोदी की 'सीक्रेट' स्ट्रैटेजी ने पहले ही दे दिया जवाब

अमेरिका ने एक नया हथियार निकाला है — Lindsay O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act, 2026 — और इसका सीधा निशाना उन देशों पर है जो रूस से तेल खरीदते हैं। भारत उस लिस्ट में सबसे ऊपर है। लेकिन दिल्ली घबराई नहीं है। क्यों? क्योंकि पीएम मोदी की तैयारी बहुत पहले शुरू हो चुकी थी।

यह कानून अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से पास होकर 18 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप के दस्तखत के साथ लागू हो गया। हाउस में 262 बनाम 159 वोटों से पास हुए इस कानून के तहत रूसी तेल या गैस के बड़े खरीदार देशों पर अमेरिका 100% तक टैरिफ लगा सकता है। अधिकार मिलना और टैरिफ लगना — ये दो अलग बातें हैं। लेकिन खतरा असली है।

अमेरिका का दोहरा मापदंड देखिए। भारत को रूसी तेल छोड़ने की धमकी दी जा रही है, जबकि US Energy Information Administration के अनुसार 2025 में अमेरिकी रिएक्टर ऑपरेटरों ने अपनी कुल विदेशी यूरेनियम एनरिचमेंट सेवाओं का करीब 26% रूस से खरीदा। नए कानून में ही कुछ रूसी Low-Enriched Uranium (LEU) के आयात को छूट दी गई है। यानी Washington का अपना घर भी शीशे का है।

फरवरी 2026 में अमेरिका ने भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25% रूस-लिंक्ड टैरिफ हटाया था और reciprocal tariff को 25% से घटाकर 18% करने की बात हुई थी। यह कोई दया नहीं थी — यह भारत की कूटनीतिक ताकत का नतीजा था। और अब जब 100% का नया दबाव आया है, तो मोदी सरकार कह रही है — “हम तैयार हैं।”

अगस्त 2025 के बाद से पीएम मोदी ने एक के बाद एक देशों के दौरे किए — EU के साथ Free Trade Agreement की बातचीत पूरी हुई, UK के साथ CEPA आगे बढ़ा, EFTA देशों के साथ बड़ी निवेश प्रतिबद्धताएं जुड़ीं, UAE के साथ ऊर्जा-LPG-डिफेंस पर साझेदारी मजबूत हुई, इटली के साथ 2029 तक 20 अरब यूरो के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय हुआ, और IMEC कॉरिडोर के जरिए भारत से यूरोप तक एक वैकल्पिक आर्थिक रूट तैयार किया जा रहा है। मई के पांच-देशीय दौरे में अकेले करीब 40 अरब डॉलर की नई निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आईं। न्यूजीलैंड में चार दशक बाद किसी भारतीय PM की यात्रा हुई। इंडो-पैसिफिक में इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच बनाई गई। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के साथ रिश्ते और गहरे हुए।

भारत का संदेश एकदम साफ है। अमेरिका बड़ा बाजार है — रहेगा भी। लेकिन भारत किसी एक देश का मोहताज नहीं है। रूस सस्ता और भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार है, और जब तक कोई बेहतर विकल्प तैयार नहीं होता, भारत वहां से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा — न चुपचाप, न दबाव में। BRICS समिट में New Delhi Declaration का सर्वसम्मति से पास होना इसी वैश्विक भरोसे की तस्वीर है।

मोदी की रणनीति गुस्से की नहीं, गणित की है। एक दरवाजा बंद हो तो दूसरा पहले से खुला हो — यही विकसित भारत की असली तैयारी है। अगले 30 दिन बताएंगे कि ट्रंप का यह नया हथियार किस पर भारी पड़ता है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *