छोड़कर सामग्री पर जाएँ
Home » Blog » आयात शुल्क और युद्ध संकट के बावजूद टाइटन का निवेश जारी रहेगा — जानिए कंपनी की पूरी रणनीति

आयात शुल्क और युद्ध संकट के बावजूद टाइटन का निवेश जारी रहेगा — जानिए कंपनी की पूरी रणनीति

आयात शुल्क और युद्ध संकट के बावजूद टाइटन का निवेश जारी रहेगा — जानिए कंपनी की पूरी रणनीति

आयात शुल्क और युद्ध संकट के बावजूद टाइटन का निवेश जारी रहेगा

टाइटन कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि बढ़े हुए आयात शुल्क और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध संकट के बावजूद वह अपनी निवेश योजनाओं में कोई कटौती नहीं करेगी। कंपनी के प्रबंध निदेशक अजय चावला ने बेंगलूरु में दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही।

चार से छह हफ्तों में मिलेगी असली तस्वीर

चावला ने माना कि अभी यह आकलन करना जल्दबाजी होगी कि प्रधानमंत्री की सोने की खपत कम करने की अपील और हाल में हुई आयात शुल्क बढ़ोतरी का ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “कम से कम चार से छह सप्ताह के आंकड़े हमें बेहतर अंदाजा देंगे। जून के मध्य से आखिर तक स्थिति साफ होगी।”

उल्लेखनीय है कि टाइटन का ज्वेलरी बिजनेस अप्रैल और मई में मजबूत बना रहा — यानी ठीक उस दौरान जब ये नीतिगत बदलाव हुए थे। यह एक सकारात्मक संकेत है।

युद्ध और महंगाई — कंपनी तैयार है

चावला ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में युद्ध उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबा खिंच गया है। इससे ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, सप्लाई चेन में रुकावट और महंगाई जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं।

लेकिन टाइटन का रुख साफ है — अस्थिर वृहद आर्थिक हालात में भी निवेश की रफ्तार धीमी नहीं होगी। यही वो आत्मविश्वास है जो एक भारतीय कंपनी को global players की कतार में खड़ा करता है।

FY2026 में 48% की जबरदस्त ग्रोथ

टाइटन ने वित्त वर्ष 2026 में ₹79,660 करोड़ का कारोबार दर्ज किया — जो पिछले साल की तुलना में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। यह आंकड़ा खुद चावला के शब्दों में “असामान्य और अभूतपूर्व” है।

कंपनी के राजस्व में तनिष्क, मिया और कैरेटलेन जैसे ज्वेलरी ब्रांड्स का योगदान करीब 90 प्रतिशत है, जो 6 साल पहले 82 प्रतिशत था। सोने की रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद यह ग्रोथ दर्शाती है कि भारतीय उपभोक्ता का भरोसा टूटा नहीं है।

वॉच और आईवियर — दोनों सेगमेंट भी रफ्तार में

टाइटन के दो अन्य प्रमुख कारोबार — वॉच और आईवियर — भी अच्छी गति से आगे बढ़ रहे हैं। वॉच सेगमेंट में सोनाटा और फास्ट्रैक जैसे पॉपुलर ब्रांड शामिल हैं जो GenZ और युवा भारत की पहली पसंद बन चुके हैं।

कुल मिलाकर, टाइटन की यह रणनीति साबित करती है कि मेड-इन-इंडिया ब्रांड्स वैश्विक उथल-पुथल में भी डटे रहने का माद्दा रखते हैं — और यही नया भारत है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *