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अमेरिकी हमले की आशंका के बीच तेहरान में बड़ी बैठक: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने ईरान के साथ बैठाई मेज

अमेरिकी हमले की आशंका के बीच तेहरान में बड़ी बैठक: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने ईरान के साथ बैठाई मेज

तेहरान में सोमवार को एक अहम कूटनीतिक बैठक हुई, जिसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल ईरानी अधिकारियों से मिले — और मकसद था एक ही: अमेरिका और इजरायल के साथ संभावित टकराव को टालना, जिसकी आशंका पूरे मध्य पूर्व में गहराती जा रही है।

कौन आया, क्यों आया

इस बैठक में सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान, पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्की की खुफिया सेवा के प्रमुख इब्राहिम कलिन ने ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों और वार्ताकारों से मुलाकात की। इस बैठक का स्पष्ट उद्देश्य तेहरान और वाशिंगटन के बीच किसी संभावित समझौते की जमीन तैयार करना था, ऐसे समय में जब दोनों तरफ से तनाव की आंच तेज हो रही है।

यह बैठक अगस्त में मक्का में संपन्न हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बाद इन चारों देशों के बीच पहली औपचारिक मुलाकात थी, जो इस समझौते की गंभीरता और क्षेत्रीय एकजुटता की बढ़ती भावना को दर्शाती है। रविवार को कतरी मध्यस्थ भी तेहरान पहुंचे, जो अमेरिका के साथ समन्वय में काम कर रहे थे — यानी यह कूटनीतिक सक्रियता कई मोर्चों पर एकसाथ चल रही थी।

क्षेत्रीय सुरक्षा की नई परिभाषा

ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव अली बाघेरी कनी ने स्पष्ट किया कि यह बैठक मध्य पूर्वी देशों के नेतृत्व में एक स्वतंत्र क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने की दिशा में एक कदम है — बाहरी शक्तियों की छाया से मुक्त। यह बयान अपने आप में एक संदेश है, जो सीधे अमेरिका और इजरायल को संबोधित करता है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने स्वीकार किया कि बैठक का कोई पूर्व-निर्धारित एजेंडा नहीं था, लेकिन यह तय था कि वार्ता क्षेत्रीय सुरक्षा के सबसे गंभीर खतरों पर केंद्रित रहेगी। सऊदी अरब ने अपने बयान में कहा कि प्रतिनिधिमंडल तनाव कम करने, क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने और शांति के रास्ते खोजने की उम्मीद लेकर आए हैं।

बैठक का नतीजा: संवाद जारी रखने की सहमति

बैठक के बाद चारों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि सभी प्रतिभागी क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपसी सहयोग को मजबूत करते हुए संवाद जारी रखने पर सहमत हुए। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने बातचीत को “बहुत अच्छी” बताया और कहा कि क्षेत्र में एक नया माहौल बन रहा है, जिसमें सुरक्षा की जिम्मेदारी इस क्षेत्र के देश खुद उठाएंगे और किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को रोका जाएगा।

यह बयान सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है — यह उस बदलते भू-राजनीतिक समीकरण की झलक है जिसमें मध्य पूर्व के देश अमेरिकी प्रभाव से स्वतंत्र होकर अपनी शर्तों पर सुरक्षा तय करना चाहते हैं।

हूती हमले और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

बैठक में यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए जा रहे बार-बार के हमलों का मुद्दा भी उठा। ये हमले सऊदी तेल बुनियादी ढांचे पर लगातार दबाव बना रहे हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस संदर्भ में ईरान की भूमिका — चाहे वह हूती समर्थन की हो या संयम की — इस पूरी कूटनीतिक कवायद का केंद्रीय बिंदु बनी रही।

फिलहाल युद्ध टला है या नहीं, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इतना तय है कि तेहरान में हुई यह बैठक मध्य पूर्व की नई कूटनीतिक भाषा का पहला अध्याय हो सकती है।

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