ऑपरेशन सिंदूर में करारी शिकस्त और 600 से ज्यादा ड्रोन्स गंवाने के बाद भी पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर भारत को खुलेआम धमकियां दे रहे हैं — सिंधु जल संधि रद्द करने की, जंग छेड़ने की, “हर तरीका इस्तेमाल” करने की। यह कॉन्फिडेंस आ कहां से रहा है? डिफेंस एक्सपर्ट्स और सोशल मीडिया पर उड़ रही रिपोर्ट्स एक नाम की तरफ इशारा कर रही हैं — यूक्रेन।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के हाथों बार-बार मुंह की खाने के बाद पाकिस्तानी मिलिट्री ने अब यूक्रेन का दामन थाम लिया है। यूक्रेनी सेना, जो रूस के खिलाफ कई सालों से हाई-टेक ड्रोन वॉरफेयर लड़ रही है, अब पाकिस्तानी फौज को आधुनिक ड्रोन ऑपरेशन्स की सीक्रेट ट्रेनिंग दे रही है। इस्लामाबाद को लगता है कि यह “संजीवनी बूटी” उसे भारत से लिए अपमान का बदला दिला सकती है।
600 ड्रोन्स, एक महाफेलियर
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सीमाओं के अंदर महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए एक साथ करीब 600 ड्रोन्स लॉन्च किए थे — अब तक की सबसे बड़ी और सबसे महंगी ड्रोन स्ट्राइक की कोशिश। नतीजा? भारतीय एयर डिफेंस ने इनमें से ज्यादातर को सीमा पर ही मार गिराया, बाकी तकनीकी खराबी की वजह से खुद ही क्रैश हो गए। कुछ मलबा रिहायशी इलाकों में जरूर गिरा, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के इस “मेगा ड्रोन प्लान” को पूरी तरह धूल चटा दी।
इस शर्मनाक हार ने पाकिस्तानी सेना को एक कड़वी सच्चाई का सामना करवाया — उनकी मौजूदा ड्रोन तकनीक और ऑपरेशनल क्षमता भारत के सामने बेहद कमजोर है। इसी कमजोरी को छिपाने और दूर करने के लिए मुनीर की नजर यूक्रेन पर पड़ी।
यूक्रेन क्या सिखा रहा पाकिस्तान को?
रूस-यूक्रेन युद्ध ने यूक्रेन को दुनिया का सबसे “बैटल-हार्डन्ड” ड्रोन पावर बना दिया है। कामिकेज ड्रोन्स, स्वार्म अटैक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रियल-टाइम टार्गेटिंग — यूक्रेन ने यह सब असली जंग के मैदान में सीखा और आजमाया है। अब वह इसी युद्ध-अनुभव को एक “कमर्शियल एसेट” की तरह बेच रहा है, और पाकिस्तान उसका सबसे नया खरीदार बन गया है।
पाकिस्तान को उम्मीद है कि यूक्रेनी ट्रेनिंग उसकी ड्रोन क्षमता को अगले स्तर पर ले जाएगी — और यही वजह है कि जनरल मुनीर अचानक इतने “कॉन्फिडेंट” नजर आ रहे हैं। लेकिन यह भरोसा कितना खोखला है, यह भारत पहले ही साबित कर चुका है।
यूक्रेन का यह कदम भारत के लिए कोई सरप्राइज नहीं है। इतिहास गवाह है कि सोवियत संघ से अलग होने के बाद यूक्रेन ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के परमाणु परीक्षण और कश्मीर मुद्दे पर कई बार भारत-विरोधी रुख अपनाया था। बाद के वर्षों में यूक्रेन की आधिकारिक नीति बदली और उसने कश्मीर को भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला माना — जो भारत की नीति के अनुकूल है — लेकिन पाकिस्तान को ड्रोन ट्रेनिंग देना साफ संकेत है कि कीव के असली हित कहां हैं।
भारत की खुफिया एजेंसियां और डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट इस घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए हैं। Bharat Mata की रक्षा करने वाली फौज पहले भी हर साजिश को नाकाम कर चुकी है — और इस बार भी करेगी। मुनीर का नया कॉन्फिडेंस, यूक्रेनी ट्रेनिंग के बावजूद, उसी अंजाम की तरफ जाएगा जो ऑपरेशन सिंदूर में हुआ।

