जेपी घोटाला: ईडी की बड़ी कार्रवाई, ₹100 करोड़ की संपत्ति जब्त
ग्रेटर नोएडा: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जेपी ग्रुप के प्रमोटर मनोज गौर की बहन की कंपनी जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और इन्वेस्टर क्लीनिक इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की कुल ₹100 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली है। यह कार्रवाई मंगलवार को हुई — और यह उस घोटाले की नई परत है जिसमें हजारों मध्यमवर्गीय भारतीयों के सपने दफन हो गए।
किसकी कितनी संपत्ति जब्त?
₹33,000 करोड़ मिले, फिर भी फ्लैट अधूरे — यह है असली स्कैम
जांच में सामने आया है कि जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (JIL) को बैंकों और खरीदारों से मिलाकर कुल ₹33,000 करोड़ प्राप्त हुए। इसके बावजूद हजारों फ्लैट आज भी अधूरे पड़े हैं।
खरीदारों ने JIL की परियोजनाओं में लगभग ₹13,000 करोड़ जमा किए थे। इनमें से करीब ₹3,200 करोड़ को यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना में डायवर्ट कर दिया गया — जो सिर्फ समय पर पूरी हुई, और जहाँ से भारी टोल वसूली जारी रही।
जेपी विशटाउन: 15 साल, 1700+ परिवार, और इंतज़ार अभी बाकी है
जेपी विशटाउन परियोजना में 1,162 एकड़ ज़मीन पर 17,000 से अधिक फ्लैट बनने थे। पंद्रह साल गुज़र गए — और आज भी 1,700 से ज़्यादा खरीदार अपने घर का इंतज़ार कर रहे हैं।
यह सिर्फ एक रियल एस्टेट घोटाला नहीं है — यह उन आम भारतीयों के साथ धोखा है जिन्होंने अपनी ज़िंदगी भर की कमाई एक छत के सपने में लगाई।
इन्वेस्टर क्लीनिक की भूमिका क्या थी?
इन्वेस्टर क्लीनिक ने जेपी की परियोजनाओं में प्रॉपर्टी बेचने का काम किया और बदले में कमीशन के रूप में फ्लैट और ज़मीन हासिल की। ईडी की नज़र में यह मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ी है।
मनोज गौर जेल में, जमानत खारिज
जेपी ग्रुप के प्रमोटर मनोज गौर को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं और कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
आरोप है कि प्रमोटर ने जानबूझकर फंड डायवर्ट किया। जेपी की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने की ज़िम्मेदारी संभालने वाली कंपनी सिक्योरिटी रियल्टी भी अब ईडी की जांच के दायरे में है।
आगे क्या?
ईडी की यह कार्रवाई साफ संदेश देती है — रसूखदार प्रमोटर हों या उनके परिजन, कानून सबके लिए बराबर है। जब तक खरीदारों को उनके फ्लैट या पैसे वापस नहीं मिलते, यह जांच जारी रहेगी।

