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अल-कायदा का पाकिस्तान को खुला अल्टीमेटम: अफगानिस्तान से हाथ खींचो, वरना…

अल-कायदा का पाकिस्तान को खुला अल्टीमेटम: अफगानिस्तान से हाथ खींचो, वरना...

अल-कायदा ने पाकिस्तान को दी खुली धमकी, अफगान तालिबान के साथ खड़े होने का ऐलान

इस्लामाबाद/काबुल: अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन अल-कायदा ने पाकिस्तान की सिविल-मिलिट्री “हाइब्रिड सरकार” के खिलाफ एक आक्रामक दो-पन्नों का घोषणापत्र जारी किया है। इसमें पाकिस्तान को अफगानिस्तान के अंदरूनी मामलों से तुरंत दूर रहने की चेतावनी दी गई है और अफगान तालिबान को पूर्ण समर्थन देने का वादा किया गया है।

मीडिया विंग ‘अस-सहाब’ के जरिए जारी हुआ फरमान

अल-कायदा की जनरल लीडरशिप ने अपने मीडिया विंग ‘अस-सहाब’ के माध्यम से यह संदेश जारी किया। संगठन ने पाकिस्तानी हुकूमत पर अमेरिका और पश्चिमी ताकतों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए इसे “जायोनी-क्रूसेडर” साजिश का हिस्सा बताया।

संगठन ने दशकों पुराने साझा उग्रवादी इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान अब अफगान हितों के खिलाफ काम करके “गद्दारी” कर रहा है। इस बयान में बिना नाम लिए अमेरिका पर भी निशाना साधा गया है।

पाकिस्तानी फौज के जवानों को सीधा संदेश

अल-कायदा ने केवल सरकार को ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना के आम जवानों को भी सीधे संबोधित किया है। संगठन ने सैनिकों से अपील की है कि वे अपनी सरकार के आदेश मानना बंद करें और “जिहादी उद्देश्यों” का साथ दें।

पुराने संघर्षों की याद दिलाते हुए अल-कायदा ने इसे पाकिस्तानियों की “धार्मिक जिम्मेदारी” करार दिया और “एहसान का बदला” चुकाने की बात कही।

पाकिस्तान को अंदर से तोड़ने की रणनीति?

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान के भीतर पहले से मौजूद असंतोष और सरकार-विरोधी गुस्से को हवा देने की सुनियोजित कोशिश है। सैन्य रैंकों में विद्रोह भड़काने की यह अपील पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है।

यह धमकी ऐसे नाजुक वक्त में आई है जब पाक-अफगान सीमा पर पहले से ही तनाव चरम पर है, बलूच विद्रोह थमने का नाम नहीं ले रहा, और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है।

भारत के नजरिए से क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

पाकिस्तान दशकों से आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी के तौर पर इस्तेमाल करता आया है — भारत इसका सबसे बड़ा भुक्तभोगी रहा है। अब वही आतंकी इकोसिस्टम पाकिस्तान को ही निगलने पर आमादा है।

अल-कायदा का यह कदम साफ संकेत देता है कि पाकिस्तान अब एक साथ कई मोर्चों पर घिरा हुआ है — और इस अस्थिरता का असर पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ सकता है। भारत को सतर्क रहने की जरूरत है।

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